Thursday, 19 January, 2012

छल- कपट की राजनीति से

छल- कपट की राजनीति से
पार्टियों का नहीं है दूर-दूर का नाता 
बस आरक्षण की राजनीति हीं इन्हें है भाता 
शुचिता की राजनीति में हो रहा था घाटा
जिसे कुछ नेताओं ने घोटाला करके पाटा 
नहीं तो राजनीति में शायद हीं कोई आता 
महामूर्ख हीं पैसा पानी की तरह बहाता
आज हर कोई  राजनेताओं पर है आरोप लगाता
जिन्ना की राजनीतिक महत्वकांक्षाओं को 
देश के बंटवारे का है कारण बताता 
नेताओं के बांटो एवं राजकरो के प्रभाव में
 नहीं आने का संकल्प दोहराता 
लेकिन चुनाव के वक्त मुस्लिम आरक्षण का जप 
जब नेता करता एवं  करवाता
भाईलोग अपने संकल्प को भूल जाता 
और  मृगमरीचिका  में आ जाता 
अपने वोट को पानी में डाल आता 
फिर नेतालोग को  पांच साल गरियाता
क्षेत्र की अनदेखी करने का है आरोप लगाता 
शायद इसी से अच्छे लोग राजनीति को  कर रहे हैं टाटा 
उन्हें राजनीति में नजर आता   है ज्वार-भाटा 
फिलहाल सभी पार्टियों ने उत्तर प्रदेश चुनाव में 
अपराधियों को है थोक में टिकट बांटा 
यानी राजनीति में अच्छे लोगों की कमी को
उन्होंने  बाहुबलियों से है पाटा   


6 comments:

  1. वोट बहुत कीमती होता है ...हास्य व्यंग्य से अच्छा तीर लगाया है
    kalamdaan.blogspot.com

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  2. achcha aur sachcha haasya vyang.bahut badhia.

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  3. बिकुल सही चित्रण किया है आपने..........
    बधाई ...
    मेरी नयी कविता तो नहीं उस जैसी पंक्तियाँ "जोश "पढने के लिए मेरे ब्लॉग पे आयें...
    http://dilkikashmakash.blogspot.com/

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  4. बहुत सुन्दर और सामयिक प्रस्तुति

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