Friday 20 January 2012

उफ्!! ये चैनलिया बाबा!!!

     दोस्तों! आजकल टीवी के लगभग सभी चैनलों पर किसी न किसी बाबा की उपस्थिति अनिवार्य सी हो गयी है। पता नहीं यह हमारी मानसिक कमजोरी के सबब है या हमारी भलमनसाहत का नतीज़ा। कोई भी चैनल खोलिए तो कोई न कोई बाबा अवश्य हमें सम्पूर्णता के प्रति अग्रसर करते दिखाई ही दे जायेंगे। टीवी चैनलों के माध्यम से ही ये बाबा विश्वव्यापी हैं अब इन्हें योग-तप आदि करने की आवश्यकता नहीं रही। टीवी चैनलों को अपनी टीआरपी बढ़ानी होती है और हमारी सहज-प्राप्ति की अपेक्षा सो लगभग सभी चैनल इस हेतु बाबाओं पर निर्भर से हो गये हैं और बाबा लोगों को भी अनायास प्रचार-प्रसार के साथ अकूत धन की प्राप्ति भी हो जा रही है।
     वैसे तो प्रभु की कृपा हमें चाहिए ही कौन नहीं चाहता कि घर बैठे-बैठे सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति हो पर अब तो इन चैनलिया बाबाओं के माध्यम से और भी सहज सुलभ हो गया है। टीवी खोलिए और चैनल बढ़ाते जाइये, विभिन्न चैनलों पर अलग-अलग बाबाओं से मिलते जाइये, बस फिर क्या...दिल की मांगी मुराद पूरी। राहु-मंगल की दशा हो या शनि का प्रकोप, शादी नहीं हो रही हो, सन्तान की आकांक्षा हो या फिर लक्ष्मी की आवश्यकता, सब कुछ बड़ी सहजता से उपलब्ध करा देते हैं ये चैनलिया बाबा। इन बाबाओं का हृदय बड़ा विशाल होता है ये वहीं से हर समस्या के समाधान के साथ अपना आशीर्वाद भी देते हैं। कोई पत्थर पहनने को कहता है तो कोई प्लांट लगाने के लिए आदि आदि। पर ये सभी चीजें आप उनके आश्रम से लेंगे तभी वह फलदायी होंगी। क्योंकि वहां से आने पर उसमें उन बाबाओं का आशीर्वाद भी जो मुफ्त में शामिल हो जाता है। बस खर्चा केवल उन अमूल्य बस्तुओं का ही आपको चुकाना है। वही वस्तुएं आप बाहर से लिए तो वह तासीर उनमें नहीं हो सकती ऐसा कहना है बाबाओं का। उनकी अपनी निजी वेबसाइट भी होती है और उनकी शॉप भी आप वहीं से घर बैठे मगा सकते हैं वे वस्तुएं जो आपके लिए मुफ़ीद हैं। आपको बहुत मेहनत नहीं करनी है घर बैठे आर्डर करिए और पा जाइये। उनके एकाउण्ट में पैसे भेज दीजिए और हो गया आपका कल्याण।
     वैसे मैं सोचती हूँ कि जब धरती पर इतने चमत्कारी बाबा हैं ही तो भगवान की पूजा क्यों? भगवान भी इन बाबाओं के कारनामों को देखकर सोचते होंगे कि चलो अच्छा हुआ इन बाबाओं की अहेतुकी पैदाइश से हमारा काम हल्का हो गया। वरना भोली-भाली विश्वासी जनता के लिए हमें ही मरना-खपना पड़ता था रातो-दिन। इन बाबाओं की उत्पत्ति ने मीडिया का फ़ायदा कराया और मीडिया ने बाबाओं को विश्वव्यापी बनाया। बस दो चाकी के बीच में फंसी है बेचारी सीधी-सादी गंवार जनता। मज़ा यह कि उसका शारीरिक, मानसिक, आर्थिक तथा भावनात्मक दोहन किया जा रहा है इन सयानों द्वारा मूर्ख बनाकर उसी की इच्छा से और उसे पता भी नहीं। बेचारी जनता!!!
(सभी चित्र गूगल से साभार)
                                                    -शालिनी

10 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति!
    --
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहाँ, कोई नहीं प्रपंच।।

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  2. कहा भी गया है कि मूर्खों के पास धन हो तो अकू़बदार भूखों नहीं मरते। हम ठहरे मूर्ख दुनिया लूटेगी ही.
    बहुत सुन्दर और सामयिक प्रस्तुति वाह!

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  3. वैसे बाबा लोगों के बारे में आपने सही कहा है ,पर मेरा मानना है की कई बार कुछ अच्छा भी ज्ञान मिल जाता है .. :)
    kalamdaan.blogspot.com

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  4. चर्चा मंच से आपके ब्लॉग पर आना हुआ.
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आपकी.
    तीखा व्यंग्य दिल को झंझोड़ता है.
    कालनेमि रुपी कलियुग अत्यंत प्रबल है,शालिनी जी.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

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  5. YOU EXPOSED REAL TRUTH THROUGH THIS POST

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  6. सही कहा आपने... हालत ये हो गयी है की कहना पड़ता है की - बाबा, इन बाबाओं से बचाओ!!

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  7. जब भी सवेरे या देर रात टी ० वी० आन करो ये चैनलिया बाबाओं का कब्ज़ा हो जाता है | बस ढेर सारे अंधविश्वासों का पिटारा खुल जाता है और हर समस्या का निदान परोसते हैं | इनसे खुदा निजात दिलाये यही दुआ करूँगा ....हाँ और कर भी क्या सकता हूँ ये बाबा लोग पैसे देकर अन्धविश्वास परोसते हैं | हम इन्हें अपने घर में आने से नहीं रोक पाते .....अब आपने आवाज उठाई है ......कास ये आवाज सरकार तक पहुचे और हमारे दर्द से वाकिफ हो ......फ़िलहाल आपका यह बेहतरीन पोस्ट लगा .....बधाई स्वीकारें शालिनी जी |

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  8. आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (२7) में शामिल की गई है /आप इस मंच पर पधारिये/और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आपका आशीर्वाद हमेशा इस ब्लोगर्स मीट को मिलता रहे यही कामना है /आभार /लिंक है /
    http://www.hbfint.blogspot.com/2012/01/27-frequently-asked-questions.html

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  9. यथार्थ को आईना दिखती पोस्ट ....

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  10. शालिनी जी आपकी इस सुन्दर और सार्थक प्रविष्टि को 'जागरण जंक्शन डॉट कॉम' पर लिंक किया जा रहा है

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