Monday 23 January 2012

चुनावी चौके

दलदल में यह देश क्यूँ, भला न धँसता जाय ।
हर दल  खड़ा  धकेलता, अब हो  कौन उपाय ।
अब  हो  कौन  उपाय,  सभी  बाहर  से  चंगे ।
मगर यहाँ हम्माम में, हैं  सब  के  सब  नंगे ।

सभ्य - वेश  में  बड़े-बड़े  मुस्टंडे   आये हैं ।
झूठ  और  मक्कारी  के  हथकंडे   लाये हैं ।
जनता की आँखों को,चुँधियाने की खातिर,
साथ  में  अपने  रंग-रंग के  झण्डे लाये हैं ।

अच्छी नज़र हो और न हो कान का कच्चा ।
जीतकर पब्लिक को कभी दे न जो  गच्चा ।
भ्रष्टाचरण  से  दूर हो , छवि पाक-साफ़ हो ,
नेता वही चुनिए  जो हो  ईमान का सच्चा ।

11 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के जन्मदिवस पर उन्हें शत्-शत् नमन!

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  2. bahut achche sandesh se paripoorn dohe.

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    बहोत अच्छा लगा आपका ब्लॉग पढकर ।

    हिंदी दुनिया

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  4. Dhanyawad hamaare blog par aakar comment karane ke liye.

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  5. सटीक और समसामयिक कविता, पर हमें विचार करना होगा की हम कब तक इनके बहकावे में आते रहेंगे, धर्म और जाती के नाम पर या फिर लालच में आकर गलत लोंगो को नहीं चुनना चाहिए इससे हमारा ही नुकसान होता है.

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  6. आज के राजनेताओं को ब्यान करती सार्थक पोस्ट

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  7. अच्छी नज़र हो और न हो कान का कच्चा ।
    जीतकर पब्लिक को कभी दे न जो गच्चा ।
    भ्रष्टाचरण से दूर हो , छवि पाक-साफ़ हो ,
    नेता वही चुनिए जो हो ईमान का सच्चा ।
    ऐसा नेता तो भाई साहब इंजिनीयर करना पडेगा (टेलर मेड ,आनुवंशिक इंजिनीयरिंग के सहारे ).अच्छा खाब है दीवाने का बेहतरीन व्यंग्य झंझट भाई का .बधाई .

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  8. अंतिम पंक्ति में ही सार है ..ध्यान देना चाहिए...आखिर हमारे भविष्य का सवाल है
    kalamdaan.blogspot.com

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  9. सामयिक और प्रभावशाली प्रस्तुति

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  10. ्सामयिक व प्रभावशाली दोहे

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