Wednesday, 25 January, 2012

ठंडी-ठंडी ठंड

     ठंडी-ठंडी ठंड आप भी कहेंगे की जब भारत में ठंड जाने को है तब मुझे याद आरही है ठंडी-ठंडी ठंड की तो मैं आपको बता दूँ की अपने भारत में भले ही ठंड कम हो गई हो मगर यहाँ अब भी ज़ोरों पर है और हम देसी होते हुए भी विदेशी कहे जाने वाले लोग ठंड के मारे गरम कपड़े लाद-लाद कर परेशान है  यह गरम कपड़े उलझनों के समान है जैसे उलझनों को जितना भी सुलझाओ जीवन सदा किसी न किसी उलझन में उलझा ही रहता है। ठीक उसी तरह यह गरम लिबास है जितने भी पहनो कम ही लगते हैं। Smile  मगर यहाँ ठंड का भी अपना एक अलग ही मज़ा है। हमारे यहाँ और यहाँ के रहन-सहन में फर्क भी एक अहम कारण है, कि यहाँ कड़ाके की ठंड होने पर भी अखरती नहीं है। अपने यहाँ बेचारे छोटे-छोटे मासूम बच्चे ठंड के मारे कांपते हुए स्कूल जाते हैं और घर वापस आने तक उनको कहीं राहत नही मिलती। मगर यहाँ केवल घर ही नहीं बल्कि कक्षा में भी हीटर लगे होते हैं जहां बाहर की कड़कती सर्दी खाने के बाद कम से कम यहाँ के बच्चों को कक्षा में राहत मिल जाती है।काश ऐसा हमारे यहाँ भी हो सकता तो कितना अच्छा होता।
     खैर हर चीज़ के आपने-अपने फायदे और नुकसान है जैसे यहाँ हीटर चलाना मजबूरी है उसके बिना रहा नहीं जा सकता है। मगर इसका नुकसान यह है, कि घर गर्म और बाहर एकदम फ्रीजी है, जिसके कारण ठंडा-गर्म होता रहता है। यहाँ सबको सर्दी जुकाम होना बहुत ही आम बात है। जिसके कारण यहाँ अधिकतर लोगों को आमतौर पर सर्दी जुकाम बना ही रहता है और जब डॉ के पास जाओ तो वो भी यही कहता है अच्छा सर्दी ज़ुकाम हुआ है आपको welcome to England  Smile खैर हर चीज़ का अपना एक अलग मज़ा होता है , मज़े से याद आया  मुझे यहाँ सबसे ज्यादा मज़ा आता है, ठंड में बच्चों को देखना बहुत ही प्यारे लगते है यहाँ के बच्चे ठंड में एक दम खिलौने की तरह... झक गोरा रंग, सुनहरी बाल, नाक और गाल दोनों ही लाल-लाल  Smile  वैसे तो बच्चे सभी बहुत मासूम और खूबसूरत होते हैं। फिर चाहे वो जानवार के ही क्यूँ ना हो, है ना !!! Smileविषय से ना भटकते हुए मैं बात कर रही थी ठंडी-ठंडी ठंड की, तो यहाँ आज कल का तापमान 0 डिग्री से थोड़ा ही ऊपर चलता है जैसे आज का तापमान ही ले लीजिये आज है अधिकतम 5 और नुन्यतम 1 अब आप खुद ही अंदाज़ा लगा लीजिये की यहाँ कितनी ठंड होगी। वैसे इसे भी ज्यादा गिरता है पारा हर बार मगर फिलहाल इतना ही गिरा है। इसलिए शायद यहाँ ठंड का अपना ही एक मज़ा है रोज़ के कार्य यूं ही ठंड में करना ठड़ भी ऐसी की यदि आप निकाल जाओ बिना मफ़लर के तो कान में दर्द होने लगता है चहरे की मासपेशियाँ भी दुखने लगती है। कई-कई दिन धूप किसी कहते हैं यह पाता ही नहीं चलता।

     वैसे बहुत से लोगों को इस कारण यह मौसम बहुत ही उदासी भरा लगता है तो कुछ को खुशगवार भी लगता है हाँ कभी-कभी दुख दायी भी हो जाता है। जब भी बर्फ गिरा करती है, घर में बैठकर वो नज़ारा देखने में बेहद खूबसूरत नज़र आता है। मगर यदि उसके बाद बाहर निकलना हो तो वही बर्फ इतनी फिसलन वाली हो जाती है, कि चलना मुहाल होता है। मगर इस सबके बावजूद भी यही वो नज़ारा है, जिसे भारत में हर जगह देख पाना संभव नहीं होता और यहाँ (U.K) में लगभग सभी जगह सर्दियों के मौसम में आम बात है। बस यह कह लीजिये कि पिछले पाँच सालों में यह शायद पहली बार हुआ होगा कि अब तक बर्फ नहीं गिरि है। वरना यहाँ तो नवम्बर में ही कड़ाके की ठंड शुरू हो जाती है।

     सब कुछ अच्छा है यहाँ, मगर वो सब कुछ नहीं है जो अपने यहाँ इंडिया में होता है। ठंड आते ही मेथी की भाजी, तो कभी तिल के मिष्ठन, जैसे गज़क आदि तो कभी गरमा गरम मूँगफली सरसों का साग ते मक्के की रोटी वाह वाह !!! मुझे तो याद कर-कर के ही मुंह में पानी आरहा है। मगर यहाँ हर जगह ऐसा कुछ भी नहीं मिल पाता। हाँ कुछ जगह संभव हो भी सकता है जहां भारतीय लोग कि जनसंख्या ज्यादा हो जैसे लंदन में,या लंदन के पास हैरो नामक जो स्थान है वहाँ मगर बाकी जगह मौसम कब बदला गया यहाँ, खाने की चीजों से नहीं बल्कि कपड़ों से पता चलता है। वरना तो बारों महीने वही गोबी, मटर, आलू,और कुछ भी नहीं। यह सब देखकर लगता है सही में नससीब वाले हैं वो जो भारत में रहते है।  Smile  वरना कुछ नहीं रखा है विदेशों में यहाँ केवल दूर के ढ़ोल सुहावने हैं बस और कुछ नहीं असली ज़िंदगी का मज़ा केवल अपने इंडिया में ही है दोस्तों... क्यूंकि यहाँ ना सामाजिक ज़िंदगी है और ना हीं ज़िंदगी के मज़े कुछ है तो वो है भारत की तुलना में कुछ थोड़े ज्यादा पैसे और पैसा सब कुछ नहीं होता इसलिए मेरा भारत महान... जय हिंद                   

5 comments:

  1. अच्छा बताया है .. ठण्ड के हाल ..
    kalamdaan.blogspot.com

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  2. बहुत सही है लेखनी, सही बहुत ही ठण्ड |
    स्वेटर जैकेट इनर में, उड़ा साल का फंड |

    उड़ा साल का फंड, ठण्ड पाकेट में पै गी |
    सब नेता बरबंड, नार्थ में जमघट है गी |

    कर लो खुब उत्पात, बाँट के पैसा दारु |
    महँगाई में त्रस्त, हुआ यह वोटर भारू ||

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  3. यहां भी इस साल अभी तक ठंड पड़ रही है। आज तो अपने शहर में धूप के दर्शन नहीं हुए।

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