Thursday, 26 January, 2012

अबोध बालक के हाथों जूता पहनना अपराध नहीं

     आज के लोगों की सबसे बड़ी कमजोरी उनमें सहिष्णुता का अभाव होना है। आज के लोगों में धैर्य एकदम नहीं रह गया है। बात-बात में लोग तैश में आ जाते है। बात का बतंगड़ बना देते हैं। तिल का ताड़ बना देते हैं। कहानी को उपन्यास बना देते हैं। महत्वहीन घटना को भी ब्रेकिंग न्यूज बना देते हैं। न्यूज वाले बनाए तो बात समझ में आती है कि क्योंकि उन्हें टीआरपी बढ़ानी होती है। लेकिन भाई लोग को क्या बढ़ानी होती है। मै भाई लोग से एक प्रश्न पूछता हूं कि क्या इस देश में कोई नेता या संभ्रांत व्यक्ति किसी अबोध बालक से अपने जूते का फीता भी नहीं बंधवा सकता। इतनी राहजनी कब से इस देश में आ गई है? क्या इस देश मे लोगों को इतनी भी स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होगी। आखिर इस देश में कैसा लोकतंत्र है जहां माननीय सदस्यों के अधिकार भी सुरक्षित नहीं हैं। विशेषाधिकार यानी घोटाले करने के अधिकार की बात ही क्या? अन्ना एवं रामदेव की वक्र दृष्टि तो पहले से हीं उन पर है। वे लोग अपने तो राजधर्म के प्रति कर्तव्य से च्युत हो ही रहे हैं। लोगों की भी ऐसा करने को कह रहे हैं। अब तो लोग भी उनके बहकावे में आने लगे हैं। और तरह-तरह से बातें बनाने लगे हैं। मेरा तो मानना है कि इस देश का लोकतंत्र खतरे में है क्योंकि यहां नेताओं के विशेषाधिकार खतरे में हैं। जहां बड़े लोगों के अधिकार सुरक्षित नहीं होगें। वहां छोटे लोगों की हालत कैसी होगी इसकी आप सहज कल्पना कर सकते हैं। किसी नेता द्वारा बच्चे से जूते का फीता बंधवाना भी कोई न्यूज है। यह भी कोई अपराध है मुझे तो नहीं मालूम। भला यह कोई हो हल्ला करने का विषय है। इसके लिए नेताजी की तारीफ़ होनी चाहिए कि नेताजी किसी को रोजगार दे रहे हैं। किसी पर दयादृष्टि कर रहे हैं। । आजकल बेरोजगारी की समस्या कितनी भयानक है। यह तो आप जानते ही होंगे। सरकार हाथ खड़े कर चुकी है। ऐसे में काम प्राइवेट सेक्टर में ही मिलेगा न! सरकारी नौकरी तो सबको मिलने से रही।
     आलोचना करने वाले आखिर यह क्यों नहीं जानते कि बड़ों की सेवा करने से आयु, विद्या, यश और बल  ये चार चीजें बढ़ती हैं। क्या लोग इन चार चीजों से उस बालक को वंचित करना चाहते हैं। आलोचक बच्चे के शुभचिन्तक हैं कि दुश्मन। सरकार को अब इस बात पर ध्यान रखना होगा कि कुछ लोग सरकार के हर काम में मीन-मेख निकालने में लगे हुए हैं। सरकार को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डैमेज कंट्रोल एक्सरसाइज शुरू कर देना चाहिए। ऐसे लोगों  के व्रेनवाश की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। नहीं तो ये लोग राजधर्म के लिए खतरा पैदा कर देंगे। सरकार एक ट्रेनिंग स्कूल खोले जिसमें लोकपाल के नुकसान एवं भ्रष्टाचार के फायदे बताया जाये।
     जूता पहनाने का तो स्वागत होना चाहिए कि बच्चा अच्छा संस्कार सीख रहा है। बच्चा संस्कारी है। वह बड़ों का सम्मान करना जानता है। कितने दु:ख की बात है कि इस देश में बच्चों की आकांक्षाओं का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। बड़ों का सम्मान करना कब से इस देश में अपराध हो गया? वह नेताजी के चरणों में शालीनता का पाठ सीख रहा है। यह भी हो सकता है कि उसके माता-पिता उसे बड़ा नेता बनाना चाह रहे हों। और चाहते हों कि बच्चा बचपन से उनके सानिध्य में रहकर नेतागिरी का गुर सीखे।  अच्छे काम की आलोचना करके इस देश में संभावनाओं का गला घोंट दिया जाता है।
     मुझे आलोचकों की आलोचना में साजिश की भी बू आती है। मतलब कि इस देश में एक ऐसा वर्ग भी है जो यह नहीं चाहता कि ज्ञान पर से उसका एकाधिकार समाप्त हो। किसी से कुछ सीखने के लिए शालीनता रखनी पड़ती है, बच्चा वही कर रहा है जी!

6 comments:

  1. क्या व्यंग्य मारा है जी!...वाह!

    ReplyDelete
  2. यही सत्य है..
    गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें ..जय हिंद !!
    kalamdaan.blogspot.com

    ReplyDelete
  3. सच्चाई तो यही है कि मुझे भी कोई ऐसी अनहोनी नहीं लगी थी कि नेता जी इसलिए जूता बंधवाने पर आमादा थे कि वह बच्चा आदिवासी था और ये भी कि यूं सार्वजनिक रूप से जूता बंधवा कर नेता जी कुछ साबित करने पर आमादा थे. बात बस इतनी सी लगी कि नेता जी को जूता बांधने में मुश्किल थी, बच्चे ने मदद कर दी, बस्स्स. हम भी अपने घरों में क्या अपने छोटे-बड़ों की मदद नहीं करते !

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति, गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए...
    एक ब्लॉग सबका

    ReplyDelete
  5. आज के चर्चा मंच पर आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
    का अवलोकन किया ||
    बहुत बहुत बधाई ||

    ReplyDelete
  6. til ka pahad banana bhi ye media vaale khoob jante hain.

    ReplyDelete

लिखिए अपनी भाषा में

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...