Wednesday 1 February 2012

ख़याल...



एक कप कॉफी और ख़यालों का साथ जैसे हो चोली दमन का साथ 
और इन्हीं ख़यालों की इस उधेड़बुन सी ज़िंदगी में 
हजारों लाखों आते-जाते,पल-पल में बदलते ख्याल 
इन ख़यालों से जैसे दिन रात जूझती सी ज़िंदगी 
कभी भरी सड़क पर भी जब निकलो अकेले यूं ही  
तो साथ होता है दिल और दिमाग में चल रहे न जाने कितने जाने-अंजाने 
से अपने पराये से कभी धूप तो कभी छाँव से ख़यालों का साथ   
जिनका न कोई सर होता है न पैर एक पल हम कुछ सोचते हैं 
तो दूजे ही पल कुछ और तब आस पास क्या हो रहा है क्या नहीं 
इस सब से कोई फर्क नहीं पड़ता उस वक्त
ऐसी मनःस्थिति मे बस इतना ही मन करता है कि चलते ही चले जाओ दूर कहीं ... 
बहुत दूर..जहां शायद कभी ख़त्म हो सके यह विचारों की उलझन 
ऐसी में अगर मिल भी जाये हमसफर कोई 
तो भी खलने लगता है उसका भी साथ कभी-कभी 
जहां उसको अपनी मन की बातें कहते हुए भी बहुत कुछ ऐसा होता है 
जिसे अक्सर छुपा जाते है हम तब न दिल को चैन मिलता है न दिमाग को शांति 
बस उबलते पानी से ख़याल जैसे उबलते ही रहते है हमारे अंदर कहीं न कहीं, 
समझ ही नहीं आता क्या हो रहा है क्या चल रहा है
जैसे नशे में हो कोई, या फिर हो कोई मौन संवाद 
जिसे आँखों से देखकर केवल महसूस किया जा सकता है 
जहां बस चुप रहकर देखा करते हैं हम अपने ही उस दिलो दिमाग के अंतर द्वंद को 
जैसे यह हमारे मन के भाव नहीं किसी और के मनोभाव हों,
जिसमें हम किसी चलचित्र की तरह खुद को ही पात्र रूप देख रहे हो      
तब ना किसी की सलाह अच्छी लगती है, न दखल
मन जैसे बस ख़यालों में ही डूबता चला जाता है   
ऐसे में अचानक महसूस किया है क्या कभी ? 
"एक कप कॉफी" की महक को 
जो सासों के जरिये अंदर तक उतरकर सुकून पहुंचा जाती है 
न सिर्फ तन को बल्कि मन को भी कहीं और तब ऐसा लगता है 
उस वक्त जैसे किसी ने नींद से जगाकर पूछा हो कॉफी पीनी है क्या 
दूजे ही पल खुद को वर्तमान में पाते है हम और 
फिर साथ होता है एक बार फिर "एक कप कॉफी" और ख़यालों का साथ    

8 comments:

  1. अच्छा लेख ..
    kalamdaan.blogspot.com

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  2. सुन्दर प्रस्तुति ||

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    Replies
    1. "एक कप कॉफी" की महक को
      जो सासों के जरिये अंदर तक उतरकर सुकून पहुंचा जाती है .shi bat hai.

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  3. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.in/2012/02/777.html
    चर्चा मंच-777-:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  4. बहुत बढ़िया प्रस्तुति
    Gyan Darpan
    ..

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