Friday 10 February 2012

बार-बार दिन यह आये

आज कल हमारे यहां बिजली महरानी के केवल दर्शन ही नहीं हो रहे हैं अपितु इनकी कृपा स्थाई रूप से चौबीसों घंटे हो गयी है। यह कृपा कब तक रहेगी यह समझना अस्थाई है। वैसे हम तो एक हफ़्ते दिन और एक हफ़्ते रात में आपकी (बिजली महरानी) कृपा के आदी हो गये थे तो अब यह अवसर हमें चकित करने वाला हो गया है। यह कृपा चुनाव के सुहाने मौसम की बदौलत मिली है सो डर भी है कि स्थिति में परिवर्तन को हम कैसे झेलेंगे जो कि निश्चित है। क्योंकि मौसम बदलता ही रहता है भारत में। वैसे यह समय हमारे लिए तो स्वर्णकाल से कम नहीं है यह मौसम यूँ ही बना रहे स्थायी रूप से क्या ऐसा सम्भव नहीं? हम तो भाई यही चाहते हैं। उत्तर प्रदेश वासियों का अगर जरा भी सहयोग मिला तो स्थाई सरकार के न बन पाने के चलते इस सुकृत्य को हम तो सम्भव ही मान रहे हैं। अब यह दूसरी बात है कि राजनीतिक दल आपसी समझौते के द्वारा कोई स्थायी सरकार बना लें और हमारी आकांक्षाओं पर पानी फिर जाये। राजनीतिक दलों की बातों का कोई भरोसा नहीं आज लड़ेंगे कल एक हो जायेंगे, चोर-चोर मौसेरे भाई। फिर हम तरस जाएंगे बिजली महरानी के दर्शन को। इस चुनावी मौसम के फ़ायदों को देख कर हम तो यही रट लगाये हुए हैं कि- ‘बार-बार दिन यह आये’।
                                                                    -शालिनी

9 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति ||

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  2. :) सही कहा
    kalamdaan.blogspot.in

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  3. बहुत बढ़िया प्रस्तुति
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  4. बिल्कुल सही , बिजली - पानी इसी मौसम में मिलता है इसलिए हमें तो यह ऋतु बसंत से भी प्रिय है

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  5. बढ़िया प्रस्तुति ...

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  6. bijli bhi to aur suvidhaaon ke jaise inhone chunavi mudda banaya hua hai.bahut achcha vyangatmak lekh.

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  7. Mai janta hoon Shalini ji bijali ki samasya se apka kshetr babhana bahut hi peedit hai......mera ganv bhi babhanan ke sameep hai ....apki chintayen vajib hain ....poori tarah se mai ap se sahamat hoon

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  8. चुनावी मौसम की मेहरबानियों का आनंद लीजिये ......:)

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