Monday 13 February 2012

... जनता है लाचार

जनता का दरबार है,जनता की सरकार ।
जनता को चूना लगे, जनता   है लाचार ।
जनता है लाचार , खड़ी बस देख रही है ।
इसकी खरी कमाई , कुर्सी   ऐंठ    रही है ।  

8 comments:

  1. Bhai Jhanjhat ji bilkul theek farmaya ....lekin kr bhi kya sakate hain es bhrsht tantr men

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर |
    बधाई ||

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर एवं भाव प्रवण कविता । मेरे पोस्ट भीष्म साहनी पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  4. ये बेसुरम कहां? एकदम सुर में है जी :)

    ReplyDelete
  5. जनता लाचार
    भ्रष्ट सरकार
    जनता बेरोज़गार
    इन्किलाब की दरकार :)

    ReplyDelete

लिखिए अपनी भाषा में

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...