Sunday 19 February 2012

खुदा ! खैर हो


हर शाख पे
बैठ गए हैं उल्लू
खुदा ! खैर हो |

बुरे हैं नेता
हैरानी किसलिए
आदमी वे भी |

विकल्प कहाँ
जनता के सामने
राजनीति में |

अच्छे व्यक्ति थे
राजनीति में कूदे
बुरे हो गए |

न कर्म में है
न शुचिता सोच में
वस्त्र सफेद |

मिले सबको
वो हाथ जोडकर
नेता ही होगा |

खादी जारी है
फैंक चुके चरखा
कूड़ेदान में |

* * * * *
                            ----- दिलबाग विर्क 

* * * * *

10 comments:

  1. अच्छा व्यंग्य ..
    kalamdaan.blogspot.in

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  2. आपके इस प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  3. सार्थक समीचीन सृजन रोचक भी ....बधाईयाँ

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  4. बहुत बढ़िया प्रस्तुति
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी लगा रहा हूँ!सूचनार्थ!
    --
    महाशिवरात्रि की मंगलकामनाएँ स्वीकार करें।

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  5. virk ji bahut hi samyik ....prastuti ...sadar abhar . kabhi mauka mil jaye mere blog pr jaroor aana .

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  6. राजनीति पर करारा कटाक्ष।

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  7. अच्छी हाईकू रचनाएं....
    हार्दिक बधाईयां.

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