Thursday 23 February 2012

हम भी हैं भारत रत्न

समय-समय पर इस देष में व्यक्ति विषेड्ढ या व्यक्तियों के समूह द्वारा भारत रत्न की मांग की जाती है। भारत रत्न के लिए कभी सरकार को कोसा जाता है तो कभी किसी संस्था को। कोई भारत रत्न की स्वयं मांग करता है तो कभी दूसरों से करवाता है। सालो भर भारत रत्न के लिए कोई न कोई सरकार को कोसता हीं रहता है। भारत रत्न मांग करने वाले सरकार को उसकी अक्षमता के लिए कोसते हैं। उनका आरोप होता है कि सरकार में प्रतिभा पहचान की कमी है। जिसके चलते लाखों प्रतिभाएं इस देष में प्रोत्साहन के अभाव में कुंठित हो जाती हैं। लोगों का यह भी आरोप होता है कि सरकार भारत रत्न उन्हें बांटती है, जिसे इसकी कद्र हीं नहीं है। जबकी जो लोग भारत रत्न के लायक हैं सरकार उन्हें देने में कंजूसी करती है। लोगों का यह भी कहना होता है कि सरकार उन्हें भारत रत्न देती तो उनकी और सरकार दोनों की कीर्ति बढ़ती। वे उपयोगितावाद के सिद्धान्त पर भी अपनी भारत रत्न की मांग को जायज ठहराते हैं, क्योंकि उनकी यह मांग अधिकतम को संतुष्टी प्रदान करनेवाली है।
लोगों का यह भी कहना है कि भारत रत्न देने में सरकार को कंजूसी का परिचय नहीं देना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि प्रत्येक भारतवासी को भारतरत्न नहीं देना लोकतंत्र के सिद्धान्तों के खिलाफ है क्योंकि यह अवसर की समानता का विरोध करता है। उनका यह भी कहना है कि सरकार अगर संकल्पषक्ति प्रदर्षित करे तो प्रत्येक भारतवासी भारत रत्न पाकर अपने को धन्य कर सकता है।
भारत रत्न साल में एक या दो को क्यों देना चाहिए। भारत रत्न का कृत्रिम अभाव क्यों उत्पन्न किया जा रहा है। क्या भारत रत्न थोक के भाव में नहीं दिया जा सकता है। जनता की इस छोटी मांग पूरे किये बिना कोई भी सरकार लोक कल्याणकारी होने का दावा कैसे कर सकती है। यह बात किसी के गले नहीं उतरेगी कि इस देष में भारत रत्न का अकाल हो गया है। बल्कि वास्तविकता यह है कि भारत रत्न का कृत्रिम अभाव उत्पन्न कर देष में प्रतिभा को हतोत्साहित किया जा रहा है। मेरा तो यहां तक मानना है कि हर भारतीय भारत रत्न है। यानी समूचे भारतवासी को भारत रत्न दिया जाना चाहिये।
क्या घोटाला करने वाला भारत रत्न नहीं है। क्या कालाबाजारी करने वाला भारत रत्न नहीं है। क्या ब्लैकमनी बनाने वाला भारत रत्न नहीं है। ब्लैकमनी के पास इतनी क्षमता है कि वह अगर देष में वापस ला दी जाए तो पूरे देष को 25 साल तक टैक्स नहीं देना पड़ेगा। आखिर इतनी संभावना ब्लैकमनी बनाने वाले के कारण हीं देष में बनी है।
इधर स्वर्ग लोक की खबरों के अनुसार अतृप्त आत्माओं ने स्वर्ग लोक में भारत रत्न को लेकर एक बैठक की। उन्होंने बैठक में जीते जी भारत रत्न उन्हें नहीं देने के लिए सरकार को कोसा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार भारत रत्न नहीं पानेे वाली दुखी आत्माओं से मांफी मांगे तथा उन्हें भारत रत्न देकर उनके भटकन को दूर करे। ऐसा नहीं करने पर वे जंतर- मंतर पर विषाल प्रदर्षन करेंगे। अगर फिर भी नहीं बात बनी तो वे अन्ना एवं रामदेव का समर्थन लेंगे। और भविष्य में सरकार के खिलाफ चुनाव प्रचार करेंगे।



9 comments:

  1. ए जी भारत रत्न को, काहे वे बेचैन ।

    नव-धनाड्य से मूंदते, क्यूँ कर अपने नैन ।
    क्यूँ कर अपने नैन, रत्न सारे *किन लायें । *खरीद
    भारत की क्या बात, जगत सिरमौर कहायें ।
    रविकर उनकी पूँछ, स्वर्ग तक देखो बाढ़ी ।।
    हैं ना सारे चोर, बिना तिनके की दाढ़ी ।।

    दिनेश की टिप्पणी - आपका लिंक
    http://dineshkidillagi.blogspot.in/

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  2. कल 24/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. शुक्रवार के मंच पर, तव प्रस्तुति उत्कृष्ट ।

    सादर आमंत्रित करूँ, तनिक डालिए दृष्ट ।।

    charchamanch.blogspot.com

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  4. badhiya vyangaatmak prastuti ....

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  5. एकदम सही व्यंग्य है ..
    बेहतरीन पोस्ट....

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