Saturday 25 February 2012

बन्दौं संत कबीर, कवी-वीर पुण्यात्मा--

File:Kabir004.jpg
बन्दौं संत कबीर, कवी-वीर पुण्यात्मा,
अन्ध-बन्ध को चीर, किया ढोंग का खात्मा ।

परम्परा परित्याग, लीक छोड़ कर जो चला,
दुनिया दुश्मन दाग, भर जीवन बेहद खला ।

खरी खरी कह बात, वीर धीर गंभीर थे,
पोंगे को औकात, ज्ञानी श्रेष्ठ कबीर थे ।

भर जीवन संघर्ष,  किया कुरीती से सतत,
इक सौ उन्निस वर्ष, निर्गुण महिमा थे रटत ।

काशी जन्मो-करम, साखी सबद सिखाय के,
  मेटा सरगे भरम, मर मगहर मा जाय के ।

5 comments:

  1. Behtarin rachna sachmuch kavir jaisa sant milna aaj ke samay mein durlabh hai. Kavir hamare samaj ka aaj bhi margdarshan kar rahe hain. Phakhand ke khatme ke liye kavir ko hamesha yad kiya jayega.

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. भर जीवन संघर्ष, किया कुरीती से सतत,
    इक सौ उन्निस वर्ष, निर्गुण महिमा थे रटत ।
    'दिन में माला जपत हैं रात हनत हैं गाय 'लिखने की कूव्वत कबीर में ही थी .

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  4. सुंदर प्रस्तुति...

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