Friday 2 March 2012

अन्ना दादा! वो भ्रष्टाचारी तो हम महाभ्रष्टाचारी

     अन्ना दादा! आप और हम सब मिलकर बहुत हल्ला मचा लिए भ्रष्टाचार पर। राजनेताओं और तन्त्र पर आरोप लगाते-लगाते, अनशन करते-करते और धमकी देते-देते हम सब ऊब चुके तो हम यू.पी. वालों ने राजनेताओं से अबकी चुनाव में पूरा-पूरा बदला ले लिया। घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। अपने भ्रष्टाचार के बूते राजनेतागण जितना पैसा बतौर घूस जनता से वसूलते पांच सालों में उससे कई गुना ज़्यादा हम लोगों ने वसूल कर लिया। जितने उम्मीदवार खढ़े थे एक-एक से पैसा लेकर वोट दिया है हम लोगों ने। अब वे कमाते रहें पांच वर्ष भरपाई नहीं कर पायेंगे। वे भी सोचें कि भ्रष्टाचारी को कोई महाभ्रष्टाचारी मिला। एक-एक वोट की क़ीमत वसूली है हम लोगों ने सभी उम्मीदवारों से और हाथ भी जुड़वाये तथा पैर पर भी गिरवाये तिस पर तुर्रा यह कि वोट दिया किसी एक को। अगर न यक़ीन हो तो आइए हमारे गांव हजारों गवाहियां पेश कर दूंगी।
     अतः अब रामलीला मैदान में जमावड़ा करने की आवश्यकता नहीं। बेचारे नेतागण कितना कमा लेंगे पांच सालों में। हम लोगों ने प्रत्येक का करोड़ों रूपये ख़र्च करवा दिया। न करें वे हमारे बिजली-पानी की व्यवस्था। शिक्षा और स्वास्थ्य की भी आवश्यकता नहीं। अब हम उनसे शिकायत नहीं करेंगे। हमने अपने वोट की पूरी क़ीमत वसूल कर ली। लगाएं वो हमसे होड़ भ्रष्टाचारिता में। वो शेर तो हम सवा शेर। सो अन्ना दादा! अब आप निश्चिन्त होकर अपने घर बैठिए और स्वास्थ्यलाभ लिजिए। आपकी उम्र भी तो किनारे है कितना जद्दोज़हद करेंगे हमारे लिए? अब हम योग्य और कुशल हो चुके हैं।। तन्त्र और राज-व्यवस्था की शिकायत करने की कोई आवश्यकता नहीं। हम अपने सचेत लेखकों, ब्लॉगरों, कार्टूनिस्टों, व्यंग्यकारों से भी आग्रह करते हैं कि भैया! नेताओं से हम यू.पी. वालों ने पूरा-पूरा दाम वसूला है अपने वोट का और उन्होंने दूना पैसा देकर ख़रीदा है तो अगले पांच वर्षों तक उन बेचारों को बख़्श ही दो। न लिखो उन पर कोई व्यंग्य, न बनाओं उनका कोई कार्टून तथा न कहो उनको भ्रष्टाचारी। यदि आपका शौक चर्राये ही इन सब विशेषणों के उपयोग करने का तो राजनेता या तन्त्र पर नहीं हम जनता पर प्रयोग करो इत्मिनान से, अब हम भी उस लायक हो गये हैं। हमारी योग्यता पर शक मत करना। नेताओं के पैसों से अब भी भरी हमारी जेब इसकी सनद है।
(चित्र गूगल से साभार)
                                                                                                                         -शालिनी




9 comments:

  1. वाह शालिनी जी! क्या धोया है जनता को बहुत सही। आपके इस अतिसुन्दर पोस्ट का लिंक जागरण जंक्शन डॉट कॉम पर भी है। सूचनार्थ

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  2. अच्छी बात कही है आपने

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  3. सौ सुनार की फिर पड़े, जनता है तैयार ।

    इक लुहार की लगा के, ताक रहा भिनसार ।

    ताक रहा भिनसार, रात यह पांच साल की ।

    नहीं गलेगी दाल, हिफाजत करो माल की ।

    चोरी लूट खसोट, डकैती बलत्कार की ।

    लूट लिया है वोट, सहो अब सौ सुनार की ।।




    दिनेश की टिप्पणी - आपका लिंक

    http://dineshkidillagi.blogspot.in

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  4. सब कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है
    चुल्लू भर जनता के हिस्से,इनके हिस्से सागर है,
    छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी
    अंधियारे बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी,

    वाह!!!!शालिनी जी,अच्छा उधेडा इन नेताओं को,
    मै तो फालोवर पहले से हूँ,आप भी फालो करे तो मुझे खुशी होगी,...
    बहुत अच्छी प्रस्तुति,इस सुंदर रचना के लिए बधाई,...

    NEW POST ...काव्यान्जलि ...होली में...
    NEW POST ...फुहार....: फागुन लहराया...

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  5. सटीक व्यंग्य.

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  6. वाह!
    आपके इस प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 05-03-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  7. सटीक बात कहती सारगर्भित एवं बढ़िया व्यंगत्म्क प्रस्तुति....

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  8. वाह बहुत खूब ...बढिया व्यंग्य

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  9. बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना,
    इंडिया दर्पण की ओर से होली की अग्रिम शुभकामनाएँ।

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