Friday 23 March 2012

अनर्गल-अनर्गल-अनर्गल-टिप्पणी-

(१)
मैया माहिर शायरा, बेटी चैटिंग क्वीन ।
अब्बू रोटी सेकते, बेटा ब्लॉग प्रवीन
बेटा ब्लॉग प्रवीन, पराठे बन न पायें ।
बेढब अब्बू लीन, अंगुलियाँ जल-जल जायें ।

"रविकर" चीखे जोर, उलटती तेल कढ़ैया ।
देह जले अति घोर, पुकारे दैया-मैया ।। 


(२)
मुशायरा भोपाल का, मैया लेती लूट ।
पर अब्बू की चाल से, पड़ती घर में फूट ।

पड़ती घर में फूट, जले पर रखने मरहम
मिली नर्स को छूट, मिटाई रविकर हरगम ।


 
गई रोटियां फूल, फैलता फला दायरा ।
मैया मन मशगूल, लूटती हर मुशायरा ।। 

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