Wednesday 28 March 2012

अपना घर अपना ही होता है ....

     जानते हो तुम्हारे घर से जाने के बाद मुझे घर कितना सुना और खाली-खाली सा लगने लगता है।  यूं तो मैं कहने को अक्सर कह दिया करती हूँ कि यही तो वो समय है मेरा जब सबके स्कूल ऑफिस जाने के बाद मैं दो घड़ी चैन से बैठकर चाय पी पाती हूँ और मन ही मन यह सोच लेती हूँ कि चलो अब सारा दिन केवल मेरा है, मेरे लिए है चाहे जो मन करे करूँ, अब तो तुम्हारे घर वापस आने तक यहाँ मेरा ही एक क्षत्र राज है, मगर यह सब कहने की बाते हैं वास्तविकता तो कुछ ओर ही है। वास्तव में घर वो स्थान है जहां यदि काम ढूँढने जाओ तो शायद एक पूरा दिन भी कम पड़ जाये और यदि न चाहो, तो कोई काम ही नहीं होता मगर यह सब मैं तुमसे कोई शिकायत करने के लिए नहीं कह रही हूँ बल्कि मुझे तो बहुत अच्छा लगता है यूं घर का काम करना और बाकी घर के सदस्यों कि तरह अपने इस घर कि भी देख भाल करना जानते हो क्यूँ, क्यूंकि जब मैं तुमसे जुड़कर यहाँ आई थी ना तब इसी घर ने मेरे पाओं कि मिट्टी को अपने अंदर जजब करके मुझे सदा के लिए अपना बना लिया था अपना मान लिया था तभी से एक अनदेखा, अंजान मगर जो अब बहुत ही जाना-पहचाना सा रिश्ता बन गया है मेरा इस घर से यहाँ की दीवारों से, यहाँ रखी हर चीज़ से मेरा एक रिश्ता सा बना हुआ है यहाँ कि हर चीज़ मुझसे बातें किया करती है अपनी भावनाओ को मेरे साथ सांझा किया करती है और उन सब से यूं बाते करते कराते कब शाम ढाल जाती है और तुम्हारे घर वापस लौटने का समय हो जाता है पता ही नहीं चलता जानते हो क्यूँ, क्यूंकि अपना घर अपना ही होता है चाहे महल हो या फिर छोटे से घर की चार दीवारी यहाँ तक की झोपड़ी ही क्यूँ ना हो अपना घर अपना ही होता है, चाहे जहां भी रहलो अपने घर का सा सुकून, शांति या आराम किसी को कहीं और मिल ही नहीं सकता फिर चाहे कोई भी जगह कितनी भी सुंदर हो या फिर कितने भी ऐश और आराम की वस्तुओं से ही क्यूँ न भरी पड़ी हो,किन्तु तब भी जो सुख और सुरक्षित होने की भावना का आभास जैसा अपने घर की चार दीवारी में प्रवेश करने के बाद मिलता है मेरा दावा है, वो सुख किसी को भी और कहीं मिल ही नहीं सकता पर क्या खुद कभी महसूस की है एक बात तुमने या फिर सोचा है क्या कभी यूं तो कहने को पूरा घर ही अपना होता है लेकिन तब भी हर घर के कोने में, कोई न कोई एक ऐसी जगह भी ज़रूर होती है जहां मन एक असीम शांति और अपने पन का अनुभव करता है, जहां वक्त के ठहराव को महसूस किया जा सकता है जो अपने घर के अलावा पूरी दुनिया में और कहीं मिल पाना संभव नहीं, वो जगह किसी भी व्यक्ति के लिए, उसके घर में बनी कोई भी जगह हो सकती है जैसे किसी के लिए पूजा घर, तो किसी के लिए महज़ कोई खिड़की,कोई बालकनी,बागीचा, छत या फिर आपका अपना कमरा या किचन घर की कोई भी जगह हो सकती है वो जहां आप अपने आप से बात करते हैं वह एक स्थान अपने आप में आपके लिए बहुत खास होता है,जहां ज़िंदगी की उलझनों और मन में चल रहे किसी भी प्रकार के विचारों को आप अपने आप से बांटते है,फिर चाहे वो, आपके अंदर चल रहा किसी प्रकार का अंतर द्वंद हो,किसी बात का दुख हो, कोई समस्या ही ,परेशानी हो या फिर चाहे कोई बेहद खुशी की बात ही क्यूँ ना हो मुझे भी बहुत अच्छा लगता हैअपने इस घर की हर एक चीज़ से बाते करना यूं ही कभी बागीचे में या घर के आँगन में टहलते-टहलते पेड़ पौधों से बाते करना या उनसे अपने मन की बातों को कहना,कभी-कभी खिड़की में घंटों खड़े रहकर बाहर के नज़रों को देखते हुए अपने आपसे बाते करना कभी-कभी तो यूं भी होता है की अपने कमरे में किसी एक जगह बैठकर तकिये को हाथों में लिए घंटो मन ही मन कुछ सोचते रहना अपने आप खुद से ही सवाल भी पूछना और खुद ही जवाब भी देना या फिर छत की मुडेर पर खड़े होकर वहाँ लगे गमलों से बाते करनाप्रकृति के साथ अपनी बातों को अनुभवों को अहसासों को बटना अपने आप में एक ऐसा सुकून देता है जिसका कोई पर्याय नहींवाकई ऐसा महसूस होने लगता है जैसे सच मुछ कुदरत आपकी बातें सुन रही हो और आपसे वो कह रही हो जो आप और से सुने की आपेक्षा रखते हो मगर कभी सुन नहीं पाते उस वक्त प्रकृति एक ऐसे दोस्त के रूप में सामने होती है जो आपकी हर बात सुनने समझने को तैयार है बिना किसी शर्त के बिना किसी शिकायत के जो हर नज़रिये से आपके साथ है यदि आप खुश हो तो वो खुश है और यदि आप दुखी हो तो दुखी भी है बस यह सब देखने की नज़र चाहिए यह सब सिर्फ ओर सिर्फ केवल अपने ही घर में संभव हो पाता है किसी और के घर में यह सुख कहाँ ,इसलिए मुझे प्यार है अपने इस छोटे से मगर मेर इस अपने आशियाने से क्यूंकि कुछ बातें खामोशी के साथ ही और खामोशी के बाद भी बहुत अच्छी लगती है...

12 comments:

  1. प्रभावशाली प्रस्तुति ।

    दिल और कलम का अच्छा समन्वय ।।

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  2. वाह! क्या बात है! 'इस अदा पे कौन न मर जाय ऐ ख़ुदा'

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  3. सुन्दर..........
    अपना घर वाकई अपना होता है....

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  4. अपने घर की तो बात ही अलग है ...

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  5. बेहतरीन रचना

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  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति ...

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  7. बहुत अच्छी पोस्ट

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  8. अपना घर वाकई अपना होता है
    अच्छी प्रस्तुति

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  9. "किसी और के घर में यह सुख कहाँ ,इसलिए मुझे प्यार है अपने इस छोटे से मगर मेर इस अपने आशियाने से क्यूंकि कुछ बातें खामोशी के साथ ही और खामोशी के बाद भी बहुत अच्छी लगती है..."
    अति सुन्दर ...और सार्थक भी....सादर.

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