Wednesday 4 April 2012

आखिर क्यूँ ?

     कहते है सच में माँ ,माँ ही होती है उसके जैसा और कोई दूसरा हो ही नहीं सकता. यह भी कहा जाता है की ईश्वर ने माँ इसलिए बनाई क्यूंकि वह खुद चाहकर भी हर वक्त हर जगह अपने बंदो की हिवाज़ात के लिए मौजूद नहीं हो सकता था। इसलिए उसने माँ को बना दिया शायद यही सच भी है, हम खुद हर दर्द ,हर तकलीफ में सबसे पहले माँ को ही याद करते हैं कभी हमारे मुंह से ऊई माँ निकलता है, तो कभी आई गा....मगर दोनों ही सूरते हैं तो माँ की ही क्यूंकि माँ बिना कहे ही अपने बच्चों के दिल कि हर बात समझ लेती है। क्यूंकि उसके बच्चे उस ही का तो अंश होते हैं, इसलिए दुनिया कि हर माँ को शत-शत नमन,
     मगर इस सब में अक्सर हम पिता के महत्व को लगभग भूल ही जाते है। आख़िर हम यह क्यूँ भूल जाते हैं कि यदि हमको दिल माँ ने दिया है, तो धड़कन पिता ने दी है। यदि माँ संस्कार देती है, तो पिता भी तो घर की  मनमोहक दुनिया के बाहर जो एक बेरहम दुनिया बसी है, उससे लड़ने का और जीतकर दिखाने का होंसला देते हैं, एक बालक के जीवन में उसके माता-पिता दोनों की ही बहुत अहम भूमिका होती है। मगर फिर भी सबसे ज्यादा क्रेडिट केवल माँ को ही दिया जाता है यहाँ तक कि कानून भी, माँ का ही साथ देता है। बेचारे पिता के बारे में तो कोई सोचता ही नहीं, जबकि माता-पिता तो सिक्के के वो दो पहलू हैं। जिनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती, मगर पिता के बारे में बहुत कम ही लोग लिखा करते हैं। ज्यादातर माँ के बारे में ही लिखा जाता है। माना की "गाय हमारी माता है तो बैल भी तो पिता हुआ न" मगर पूजा केवल गाय को जाता है। यह तो बहुत ना इंसाफ़ी है।
     यदि हम अपने बचपन की स्मृतियों को याद करें और यदि में मेरे अनुभवों की बात करूँ तो मुझे तो हमेशा अपने पापा से ज्यादा अपनी मम्मी से डर लगा करता था। जबकि आमतौर पर यह बात कम ही देखने को मिलता है बच्चे माँ के ज्यादा करीब होते हैं और मन में पिता का डर हुआ करता है। बचपन से ऐसा डर बनाया भी जाता है, कि देखो ऐसा नहीं किया तुमने तो पापा आकर डाँटेंगे, फिर मत रोना और न आना हमारे पास हम नहीं जानते, वैसे तो समान्यता यह भी देखा जाता है कि लड़के माँ के और लड़कीयाँ पिता के ज्यादा करीब होती है शायद इसलिए मैं मेरे पापा के ज्यादा करीब हूँ। जाने क्यूँ मम्मियाँ बात-बात पर बहुत डाँटा डपटा करती हैं ज़रा सी कुछ चूक हुई नहीं की सबसे पहले मम्मी का ही चहेरा नज़र आता है गुस्से वाला फिर भले ही चाहे एक बार को मम्मी उस चूक पर ना भी डांटे, जैसे जब रसोई में नया-नया कम करना सीखो तो अक्सर कोई न कोई भूल चूक होती ही रहती है। जैसे आंटा गूँदते वक्त पानी ज्यादा हो जाना यह बहुत ही आम बात है ,मगर जब भी ऐसा हो जाया करता था जान सुख जाती थी कि अब तो बस भगवान ही बचा सकता है। वरना आज तो गए काम से बहुत डांट पड़ने वाली है।
     यहाँ एक आंटे के विज्ञापन को देखकर मुझे यह बात महसूस हुई और मेरी यादें ताज़ा हो गयीं दिल छु गया मेरा यह विज्ञापन उसमें भी यही दिखाया गया है मगर बस उसमें पानी ज्यादा होने पर डांट नहीं पड़ी जो की असला ज़िंदगी में ज्यादातर पड ही जाया करती थी। :) ऐसे बहुत ही कम मौके होंगे जिसमें उम्मीद हो की डांट पड़ेगी और पड़े ना, फिर भी मम्मी के डांट के आदि हो जाने के कारण डांट का असर भी कम हो जाता है और यदि पापा एक बार सख्ती से कुछ बोल दें तो समझो वो पत्थर की लकीर।
     मगर मेरे साथ ऐसा नहीं था और न आजा है मेरे लिए मेरे पापा वो सब कर दिया करते थे जिसके लिए मम्मी कभी राज़ी नहीं होती थी :) लोगों को अक्सर पापा नारियल के समान लगते हैं पर से सख्त मगर अंदर से बहुत नर्म मगर माँ भी तो ऐसी ही होती है,हाँ इतना ज़रूर है कि माँ का प्यार दिखता है और शायद पापा लोग अपना प्यार वैसे दिखा नहीं पाते मगर करते तो वो भी उतना ही प्यार हैं जितना कि  माँ फिर भी पापा के ऊपर कोई कुछ क्यूँ नहीं लिखता ? आप भी इस विज्ञापन को देखिये और बताइये की इतनी सारी रोज़-रोज़ की डांट के बाद भी मम्मी ही क्यूँ याद आती हैं सबको और ढेर सारे लाड़ प्यार के बावजूद भी लोग पापा को खुलकर याद नहीं कर पाते आख़िर क्यूँ ? :)  

9 comments:

  1. यदि माँ संस्कार देती है, तो पिता भी तो घर की मनमोहक दुनिया के बाहर जो एक बेरहम दुनिया बसी है, उससे लड़ने का और जीतकर दिखाने का होंसला देते हैं,
    बहुत बढ़िया ,बेहतरीन पोस्ट,....

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: मै तेरा घर बसाने आई हूँ...

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  2. सुन्दर और सार्थक आलेख धन्यवाद और बधाई

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  3. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  4. माँ एक शब्द ही काफी जिसे उच्चार्तेही सुकून मिलता है !

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ।



    निवेदन --
    आजकल नए ब्लॉग की खोज में लगा हूँ ।
    आप से कुछ अच्छे ब्लॉग के लिंक की आशा रखता हूँ ।
    चर्चा मंच के लिए ।

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  6. सुन्दर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।
    http://vangaydinesh.blogspot.in/2012/02/blog-post_25.html
    http://dineshpareek19.blogspot.in/2012/03/blog-post_12.html

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  7. सराहनीय पोस्ट, आभार.

    कृपया मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" की नयी पोस्ट पर भी पधारें

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  8. आपकी पोस्ट कल 5/4/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com
    चर्चा - 840:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  9. सुन्दर और सार्थक आलेख धन्यवाद.....

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