Tuesday 10 April 2012

यूपी सरकार का काला सच...


     सोच रहा हूं कि आज आपको कुछ नई भले ना हो लेकिन रोचक जानकारी दूं। आपको पता है यूपी मंत्रिमंडल के 80 फीसदी से ज्यादा मंत्रियों की रात की नींद उड़ी हुई है। दरअसल मंत्रियों को लग रहा था कि शपथ लेते ही उनकी कमाई शुरू हो जाएगी,  क्योंकि यूपी में ट्रांसफर पोस्टिंग आज भी  मंत्रियों और बड़े नौकरशाहों की कमाई का एक प्रमुख जरिया है। अब नई सरकार आई है तो उसे पुरानी सरकार के अफसरों को तो हाशिए पर लाना ही है, लेकिन मुश्किल ये है कि यूपी के अफसरों को ना जाने क्या हो गया है कि वो खुद प्रयास ही नहीं कर रहे हैं कि उन्हे मनचाही पोस्टिंग दे दी जाए।
     अब अगर कोई अफसर प्रयास नहीं कर रहा है तो भला वो पोस्टिंग के लिए पैसे क्यों देगा। सुना है कोने  में बैठे किसी तरह दिन काट रहे अफसरों को फोन जाता है कि आप कुछ नई जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं। अफसरों को पता है कि इस समय तो इनकी मजबूरी है, नई जिम्मेदारी देगें नहीं तो जाएंगे कहां, मायावती के शासन में मलाई काट रहे अफसरों की छुट्टी तो होनी ही है। लिहाजा किनारे पड़े अफसर भी कहते हैं कि ना जी मैं तो ठीक ठाक हूं। बच्चों की पढाई भी लखनऊ में बेहतर तरीके चल रही है, लिहाजा मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
     ऐसे में जब किसी अफसर को कोई खास पद चाहिए ही नहीं, वो कहीं भी खुशी से नौकरी करने को तैयार बैठा है, तो बेचारे मंत्रियों की नींद तो उड़नी ही है। अफसरों की इस बेरुखी से एक जाति विशेष यानि यदुवंशियों का भाग्य खुल गया है। यादवों का भाग्य ऐसा खुला है कि यूपी के नौकरशाह एक दूसरे ये चुटकुला सुनाते फिर रहे हैं। मुख्यमंत्री किसी अफसर से नाम पूछतें हैं तो अफसर अपना नाम कुछ इस तरह बताता है। सर मेरा नाम तो आर एन मिश्रा है, लेकिन घर में लोग मुझे प्यार से यादव जी यादव जी पुकारते हैं। सर ये नाम मुझे अच्छा भी लगता है। हो सकता है कि कुछ लोगों का भला नाम के चक्कर में हो जाए।
     चलिए एक खुलासा और सुन लीजिए, आप सोचते होंगे कि ये चौथा खंभा यानि पत्रकारिता, सब के सब बड़े ही ईमानदारल टाइप लोग.. ये बकवास है। आपको बताऊं सूबे  में थोड़ा भी आपकी हनक है तो आप एक दो दिन नहीं, घंटे भर में मुंबई के जुहू बीच में फ्लैट लेने की स्थिति में हो सकते हैं। मित्रों मैं कई राज्यों में नौकरी कर चुका हूं, पर सालिड पत्रकारों के लिए जिस तरह का कोटा यूपी  में है, वैसा कहीं नहीं है। यहां अगर आप थोडा भी रसूखदार पत्रकार हैं तो सूबे की सरकार का एक अलिखित संविधान है कि आप साल में एक इंजीनियर का ट्रांसफर पोस्टिंग करा सकते हैं। अब ये अलग बात है कि इंजीनियर आपका दोस्त है या क्लाइंट। ये बड़ा नंगा सच है। कहते हुए भी घिन आ रही है, पर है तो है।
     बहरहाल लोक निर्माण विभाग की हालत तो बहुत पतली है। यहां कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला तो इंजीनियर बेचारे कहीं पोस्टिंग लेकर भी क्या करेंगे। लेकिन इंजीनियरों को समझाया जा रहा है कि वो अच्छी जगह चुनें, सभी  जिलों को अच्छा फंड दिया जाएगा। उन्हें बताया जा रहा है कि विभाग की हालत भिखमंगों जैसी इसलिए हुई है कि मायावती ने सभी का फंड काट कर अंबेडकर पार्क में लगा दिया था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग के कुछ ठेकेदार अब एक बार फिर अपनी गाड़ियों में डीजल भरवाना शुरू किया है, उन्हें लग रहा है कि कुछ चमत्कार हो सकता है। वैसे इन दोनों विभागों का भगवान ही मालिक है।
     वैसे हेल्थ महकमा ऐसा है कि सरकार कोई भी हो, यहां का बजट खत्म नहीं कर सकती। यहां तमाम डिप्टी सीएमओ अभी से लखनऊ का चक्कर काट रहे हैं। सोनभद्र के सीएमओ के लिए तो एक पंडित जी ने 10 लाख रुपये की पेशकश भी मंत्री को कर दी है, लेकिन सीधे मंत्री को नहीं, उसके चेले को। चेले का दावा है कि पहली ही सूची  में पंडित जी का नाम होगा और वो सोनभद्र की कमान संभाल लेंगे। हां  एक बात तो बताना ही भूल  गया। खादी भंडार का बुरा हाल है। इस महकमें के मंत्री बने हैं वो पांच साल पहले भी इसी महकमें को देख रहे थे, बेचारे की कुर्सी गई तो अफसरों ने इनका कमीशन ही रोक लिया। अब दोबारा वहीं पहुंच गए हैं।पता कर रहे हैं कि फलाने साहब अब कहां है। हाहाहहा। कई तो अफसर रिटायर हो गए हैं, लेकिन मंत्री जी को उनका नाम अब भी याद है।
     कोई नहीं अभी तक मैं बातें हंसी मजाक में कर रहा था, पर मित्रों सच ये है कि यूपी में आज मंत्रियों पर नौकरशाह हावी हो गए हैं। मंत्री बेईमानी की बात करता है तो अफसर  पहले ही हाथ खड़े कर दे रहे हैं कि ये तो नहीं हो सकता। मंत्री पूछता है कि मंत्री आप हो या मैं। अफसर का जवाब  आता है कि मंत्री तो आप ही हैं, पर जो पहले चल रहा था, वो अब उस तरह से नहीं चल पाएगा। बराबर बराबर बंटेगा। पहले तो अफसर सिर्फ बदनाम होते थे, अब अफसरों का नाम होगा, मंत्री को बेईमानी झेलनी पडेगी। है ना मजे की। पूर्व मुलायम सिंह यादव समझ रहे थे कि बेटे को गद्दी सौंप कर वो गंगा नहाने चले जाएंगे। कैसे जा सकते हैं, बेचारे अखिलेश को ऐसी टीम दे दिया है, जिसमें चोट्टों की भरमार है। मुझे तो लगता है कि कहीं अखिलेश ही गुस्सा होकर अपने पापा श्री को बोल दे कि ये अपने पापी मंत्रियों को खुद ही संभालो। मुझे नहीं चाहिए बूढे और बेईमान मंत्रियों की फौज..।

7 comments:

  1. मंत्री कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेगें,इन नेताओं की आदत न बदली है बदलेगी,..

    RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....
    RECENT POST...फुहार....: रूप तुम्हारा...

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  2. चोट्टे चौगोषा लखें, चमचे चुप चुबलांय ।

    चौगोषा मिष्ठान भर, चाट-चूट के खांय ।

    चाट-चूट के खांय, हरेरी सबके छावे ।

    अफसरगन उकताँय, जान जोखिम में पावे।

    फिफ्टी-फिफ्टी होय, चलाचल चक दे फ़ट्टे ।

    व्यर्थ हुवे बदनाम, आज मौसेरे चोट्टे ।।

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  3. sabhi ek jaise hain koi bhi doodh ka dhula nahi hai doosri sarkaar sabse pahle aakar pahle vaali sarkar ke jhande ukhaadti hai.baharhaal aalekh bahut pasan aaya taaje haalat ki jaankari dete rahiye.

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  4. चोर चोर मौसेरे भाई .... हाँ अगर अफसर ही ट्रांसफर न छहे तो मंत्री जी की नींद तो खराब होनी ही हुई

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  5. उत्कृष्ट कृति |
    बुधवारीय चर्चा-
    मस्त प्रस्तुति ||

    charchamanch.blogspot.com

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  6. शुभकामनायें देश को ...

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