Thursday 12 April 2012

रहता रविकर मस्त, गधे से दुनिया जलती

नई-गलती 


गलत कभी भी ना करें, केवल दो इंसान ।
महा-आलसी का-हिली, बेवकूफ नादान । 

बेवकूफ नादान, समझ न पाता गलती ।
रहता रविकर मस्त, गधे से दुनिया जलती ।

 महा-आलसी काम, करे ना खुद से कोई ।
फिर गलती बदनाम, कहाँ से क्यूँकर होई ।।

 

 

23 June, 2011

को प्रकाशित

  पुरानी गलती

गलती कर कर के बने, महा-अनुभवी लोग |



शान्ति-प्रिय होते सदा, जिनको प्रिय सम्मान |
करते छल हद तोड़  कर,  माया जिनके प्राण |  

माया   जिनके   प्राण,    डुबाते   सारे   रिश्ते |
शांतिप्रिय  जो लोग,  आज  के  वही फ़रिश्ते |

पर रविकर यह शांति,  नहीं श्मशान घाट की |
करता पूजा कर्म,  जिन्दगी जिए ठाठ  की || 


*          *          *          *           *           *

गलती कर कर के बने, महा-अनुभवी लोग |
महाकवि बनता कोई, सहकर  कष्ट वियोग |

सहकर कष्ट वियोग, गलतियाँ  करते जाएँ  |
किन्तु रहे यह ध्यान, उन्हें फिर न दोहराएँ |

कह रविकर सन्देश, यही है  श्रेष्ठ-जनों का  |
पंडित "शास्त्री" संत, आदि सब महामनों का || 


&          &             &              &          & 

बिकता है हर आदमी, भिन्न-भिन्न है दाम |
सच्चा मोल चुकाय वो, पड़ता जिसको काम |

पड़ता  जिसको  काम , खरीदे  देकर  पैसा  | 
करता  न  सम्मान,   करे  बदनाम   हमेशा |

पर रविकर यदि प्यार, ख़रीदे तुम्हें तोल के -
बिक जाना तुम यार, वहाँ पर बिना मोल के ||

10 comments:

  1. गलती कर कर के बने, महा-अनुभवी लोग
    वह वाह! वह वाह!

    ReplyDelete
  2. गलती कर कर के बने, महा-अनुभवी लोग |
    महाकवि बनता कोई, सहकर कष्ट वियोग |

    सहकर कष्ट वियोग, गलतियाँ करते जाएँ |
    किन्तु रहे यह ध्यान, उन्हें फिर न दोहराएँ |
    जीवन और दर्शन के सूत्र लिए है यह दोहावली .बेंगलुरु के शतश :प्रणाम रविकर जी के नाम.

    ReplyDelete
  3. बार बार गलती करे बनता वही महान,
    मरा मरा जपते हुए,मिला तुलसीदास को ज्ञान,

    बहुत अच्छी सुंदर रचना,रविकर जी,...

    MY RECENT POST ...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....

    ReplyDelete
  4. बहुत अच्छा
    कलमदान

    ReplyDelete
  5. महा-आलसी काम, करे ना खुद से कोई ।
    फिर गलती बदनाम, कहाँ से क्यूँकर होई

    ...बिलकुल सही कहा आपने!

    ReplyDelete
  6. आभार डा. अरुणा जी, ऋतू जी,
    धीरेन्द्र जी , वीरू भाई
    और गाफिल जी ||

    ReplyDelete
  7. वाह्!
    क्या गधा बनाया है
    सारी दुनिया को जलाया है !

    ReplyDelete
  8. आज शुक्रवार
    चर्चा मंच पर
    आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति ||

    charchamanch.blogspot.com

    ReplyDelete
  9. पर रविकर यदि प्यार, ख़रीदे तुम्हें तोल के -
    बिक जाना तुम यार, वहाँ पर बिना मोल के ||
    बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  10. रविकर जी.... गधे से दुनिया जलती है.... सौ फीसदी खरी बात कह दी... मजा आ गया.

    ReplyDelete

लिखिए अपनी भाषा में

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...