Friday 13 April 2012

तो रक्त-कोष की पहरेदारी, नर-पिशाच के जिम्मे आई

चालबाज, ठग, धूर्तराज   सब,   पकडे   बैठे   डाली - डाली |

आज बाज को काज मिला जो करता चिड़ियों की रखवाली |


गौशाला मे धामिन ने जब, सब गायों पर छान्द लगाया |
मगरमच्छ ने  अपनी हद में,  मछली-घर मंजूर  कराया ||  


महाघुटाले - बाजों   ने   ली,  जब तिहाड़ की जिम्मेदारी |

जल्लादों ने झपटी झट से,  मठ-मंदिर की  कुल मुख्तारी ||



अंग-रक्षकों  ने  मालिक  की  ले ली  जब से मौत-सुपारी |

लुटती  राहें,   करता  रहबर  उस  रहजन  की  ताबेदारी  ||



शीत - घरों  के  बोरों  की  रखवाली  चूहों  का  अधिकार |

भले - राम   की   नैया   खेवें,  टुंडे - मुंडे   बिन   पतवार ||


तिलचट्टों ने तेल कुओं पर, अपनी कुत्सित नजर गढ़ाई |
तो रक्त-कोष  की  पहरेदारी,  नर-पिशाच के जिम्मे  आई |
 

6 comments:

  1. अंग-रक्षकों ने मालिक की ले ली जब से मौत-सुपारी |
    लुटती राहें, करता रहबर उस रहजन की ताबेदारी ||

    वाह!!!!!रविकर जी कमाल की रचना,.....

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  2. महाघुटाले - बाजों ने ली, जब तिहाड़ की जिम्मेदारी |
    जल्लादों ने झपटी झट से, मठ-मंदिर की कुल मुख्तारी ||
    सुंदर प्रस्तुति. यही हो रहा है चारों ओर..................

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  3. लाजवाब! क्या बात है...बहुत ख़ूब

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  4. चालबाज, ठग, धूर्तराज सब, पकडे बैठे डाली - डाली |
    आज बाज को काज मिला जो करता चिड़ियों की रखवाली |
    ..sateek prastuti..

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  5. कल 17/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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