Friday 20 April 2012

प्यास बुझी ना बावली, ले ले बच्ची गोद-

प्यास बुझी ना बावली,  किया वारुणी पान ।
हुआ बावला इस कदर, भूल गया पहचान ।।  

प्यास बुझी ना बावली, ढूंढे सलिल अथाह । 
गया बावला दूर अति, पकड़ समन्दर राह ।। 

प्यास बुझी ना बावली,  बैठ घास पर जाय ।
शबनम बिखरी चमकती, जाती प्यास बुझाय ।। 

प्यास बुझी ना बावली,  प्रभु चरणों में बैठ ।
चरणामृत का पान कर, अपने कान उमेठ ।।

प्यास बुझी ना बावली, करले इक तदवीर ।
वृद्धाश्रम जा घूम ले, पी ले उनकी पीर ।।

प्यास बुझी ना बावली, ले ले बच्ची गोद ।
अश्रु-कणों का पान कर, जीवन कर सामोद ।।

15 comments:

  1. वाह.....सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,...

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

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    1. ख़ूबसूरत रचना, सुन्दर भावाभिव्यक्ति .

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. ख़ूबसूरत रचना.
    Thanks.

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  4. प्यास बुझी ना बावली, वारिधि रहा अतृप्त।
    ‘रविकर’ का सानिध्य ही कर सकता संतृप्त।।

    प्यास बुझाने का ख़ूब तरीक़ा बताया आपने...शुक्रिया

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  5. इतनी सुन्दर रचना के लिए बधाई...

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  6. नमस्ते............बहुत खुबसूरत अभिवयक्ति.....

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  7. प्यास बुझी न बावली...............
    सुंदर प्रस्तुति हेतु आभार..

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  8. बुझेगी बुझेगी
    प्यास बावली
    होने से कभी
    तो रुकेगी ।

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  9. इतना कुछ किया...पर प्यास बुझी न बावली!...आखिर में बच्ची जब गोद में उठा ली!...मन तृप्त हो गया....मनुष्य की मानसिकता दर्शाती सुन्दर रचना!....आभार!

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  10. परहित प्रेरित सौदेश्य रचना भटकाव को दिशा देती जीवन के -प्यास बुझी न बावरी .....

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  11. प्रगाढ़ प्रेम से उद्भूत रचना ,स्थूल से सूक्ष्म की और प्रयाण ....
    रविवार, 22 अप्रैल 2012
    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग तीन
    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग तीन
    डॉ. दाराल और शेखर जी के बीच का संवाद बड़ा ही रोचक बन पड़ा है, अतः मुझे यही उचित लगा कि इस संवाद श्रंखला को भाग --तीन के रूप में " ज्यों की त्यों धरी दीन्हीं चदरिया " वाले अंदाज़ में प्रस्तुत कर दू जिससे अन्य गुणी जन भी लाभान्वित हो सकेंगे |
    वीरेंद्र शर्मा

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  12. परहित प्रेरित सौदेश्य रचना भटकाव को दिशा देती जीवन के -प्यास बुझी न बावरी .....
    प्रगाढ़ प्रेम से उद्भूत रचना ,स्थूल से सूक्ष्म की और प्रयाण ....
    रविवार, 22 अप्रैल 2012
    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग तीन
    कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग तीन
    डॉ. दाराल और शेखर जी के बीच का संवाद बड़ा ही रोचक बन पड़ा है, अतः मुझे यही उचित लगा कि इस संवाद श्रंखला को भाग --तीन के रूप में " ज्यों की त्यों धरी दीन्हीं चदरिया " वाले अंदाज़ में प्रस्तुत कर दू जिससे अन्य गुणी जन भी लाभान्वित हो सकेंगे |

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  13. प्यास बुझी ना बावली, ले ले बच्ची गोद ।
    अश्रु-कणों का पान कर, जीवन कर सामोद ।

    Bahut khoob. Apne liye jiye to kya jiye too ji ye dil jamane ke liye

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