Tuesday 1 May 2012

कांग्रेस के डर्टी पिक्चर में हीरो सचिन


     राज्यसभा में सचिन के मनोनयन को लेकर पेच फंस गया है। कांग्रेसियों की कारस्तानी का बेवजह खामियाजा बेचारे सचिन को भुगतना पड़ रहा है। सियासी गलियारे में मचे तूफान से इतना तो बिल्कुल साफ है कि कांग्रेस या फिर सचिन में कोई एक तो वाकई डर्टी है। मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि सचिन ने राज्यसभा में जाने की इच्छा खुद तो नहीं ही जताई होगी, कांग्रेसियों ने ही अपना काला चेहरा सचिन को आगे रखकर साफ दिखने के लिए भारतीय संविधान की ऐसी तैसी कर .ये मनोनयन किया होगा।
     अरे हां पहले आपको ये बता दूं कि सचिन के मनोनयन को लेकर आखिर पेंच क्या फंसा है।  दरअसल संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर के राज्यसभा में मनोनयन पर संवैधानिक प्रश्न उठाए हैं। सुभाष कश्यप का कहना है कि राज्यसभा में सिर्फ कला, समाजसेवा, विज्ञान या साहित्य क्षेत्र के ही लोगों के मनोनयन का प्रावधान है। कश्यप ने सरकार से जानना चाहा है कि सचिन का मनोनयन किस आधार पर किया गया है। हालाकि कश्यप ये भी कहते हैं कि मैं ये नहीं कह रहा हूं कि सचिन का मनोनयन गलत है, न मैं ये कह रहा हूं कि सचिन को सांसद नहीं होना चाहिए। लेकिन मैं सिर्फ ये कह रहा हूं सरकार देश को यह बताए कि सचिन का मनोनयन किस श्रैणी में किया गया है। यदि सरकार यह मानती है कि क्रिकेट खेलना कला है या क्रिकेट का खिलाड़ी समाजसेवी है तो फिर मुझे कुछ नहीं कहना है, लेकिन अगर क्रिकेट समाजसेवा, कला, संस्कृति और विज्ञान में कुछ नहीं है तो संविधान में संशोधन किए बगैर सचिन जैसे खिलाड़ी को अपमानित कैसे कर सकते हैं?
     आपको याद होगा कि किसी भी खिलाड़ी को भारत रत्न दिए जाने का कानून में प्रावधान नहीं था। देश भर से सचिन को भारत रत्न दिए जाने की मांग उठी तो तो सरकार घुटनों पर आ गई और झटपट कानून में संशोधन कर ये प्रावधान कर दिया गया कि अब किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले को ये सम्मान दिया जा सकता है। कानून में संसोधन के बाद सचिन को भारत रत्न दिए जाने का रास्ता साफ हो गया। पर इसी बीच खेल से जुड़े कुछ और महान खिलाड़ियों के नाम उठने लगा कि उन्हें भी भारत रत्न दिया जाना चाहिए। इसमें हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद्र का नाम सबसे ऊपर था। सरकार को लगा कि बेवजह विवाद में पड़ने से बेहतर है कि सचिन को राज्यसभा में मनोनीत कर देश को ये संदेश दिया जाए कि हम सचिन को लेकर गंभीर है। जबकि सच ये है कि सरकार अभी सचिन को भारत रत्न देने से बचना चाहती है।

4 comments:

  1. लेकिन अगर क्रिकेट समाजसेवा, कला, संस्कृति और विज्ञान में कुछ नहीं है तो संविधान में संशोधन किए बगैर सचिन जैसे खिलाड़ी को राज्य सभा में नही लेना चाहिए,....

    MY RESENT POST .....आगे कोई मोड नही ....

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  2. "लेकिन अगर क्रिकेट समाजसेवा, कला, संस्कृति और विज्ञान में कुछ नहीं है तो संविधान में संशोधन किए बगैर सचिन जैसे खिलाड़ी को अपमानित कैसे कर सकते हैं?"

    ---धुलाई का इससे अच्छा साबुन कोई भी कम्पनी नहीं बना सकती और उसका उपयोग आप सा कोई नहीं कर सकता

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  3. सचिन को राज्यसभा में मनोनीत कर देश को ये संदेश दिया जाए कि हम सचिन को लेकर गंभीर है। जबकि सच ये है कि सरकार अभी सचिन को भारत रत्न देने से बचना चाहती है।..yadi aisa hai to yah to sarasar chhalbaji hogi.. waise raajniti mein sab jayaj hi kaha jaat hai..
    bahut badiya jaagruk prastuti...

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  4. आपकी पोस्ट 3/5/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 868:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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