Friday, 11 May, 2012

रमिया घर-बाहर खटे-

रमिया घर-बाहर खटे, मिया बजाएं ढाप ।
धर देती तन-मन जला, रहा निकम्मा ताप ।  

रहा निकम्मा ताप, चढ़ा कर देशी बैठा |
रहा बदन को नाप, खोल कर धरै मुरैठा ।

पति परमेश्वर मान, ध्यान न देती कमियां।
लेकिन पति हैवान, बिछाती बिस्तर रमिया ।।

4 comments:

  1. रमिया को तो खटना ही पड़ता है

    ReplyDelete
  2. पति परमेश्वर मान, ध्यान न देती कमियां।
    लेकिन पति हैवान, बिछाती बिस्तर रमिया ।।

    रमिया आखिर क्या करे .......

    ReplyDelete
  3. यह मज़मून अच्छा है.

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete

लिखिए अपनी भाषा में

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...