Monday, 25 June, 2012

जनता   ने   उम्मीदों का    सूरज  था  जिनको माना |
अपने  सुख-दुःख का  उत्तरदायी था जिनको जाना |
आज   वही   कुर्सी   में  फंसकर   भूल  गए है  इसको |
अपनी  स्वार्थ-साधना  से ही  फुरसत नहीं है  उनको |
जिन्हें  सुनाई देती है  जनता की  करुण पुकार नहीं |
जनसेवा की डींग मारने  का उनको अधिकार नहीं | 

6 comments:

  1. सही कहा है आपने, उनको क्या अधिकार |
    स्वार्थ-पूर्ति में रम रहे, मन पोसे कुविचार ||

    ReplyDelete
  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २६/६ १२ को राजेश कुमारी द्वारा
    चर्चामंच पर की जायेगी

    ReplyDelete
  3. जिन्हें  सुनाई देती है  जनता की  करुण पुकार नहीं |
    जनसेवा की डींग मारने  का उनको अधिकार नहीं | 
    ....सत्य कथन . ..

    ReplyDelete

लिखिए अपनी भाषा में

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...