Sunday 1 July 2012

यादों का पाखी ( हाइकु )

यादों का पाखी 
मेहमान हमारा 
बिन बुलाया ।

नहीं उड़ता 
दिल के कंगूरे से 
याद का पाखी ।

यादों का पाखी 
बैठा शाखे-दिल पे 
बरसे आंसू ।

भेज दिए  हैं 
तूने यादों के पाखी 
खुद न आया ।

यादों का पाखी 
कलरव करता 
सकूं हरता ।

****************

14 comments:

  1. बहुत सुन्दर!
    इस पोस्ट की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी है!
    सूचनार्थ...!

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  2. bahut sundar haiku ...
    shubhakamanayen .

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  3. वाह भई दि‍लबाग़ जी वाह

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  4. बेहतरीन अभिव्यक्ति ,.......शुभकामनायें जी /

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  5. वाह...वाह......
    बहुत सुन्दर...

    सादर
    अनु

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  6. बढ़िया जी |
    बधाई स्वीकारें |

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति,,,सुंदर हाइकू ,,,,,

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: बहुत बहुत आभार ,,

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  8. वाह: सभी हाइकु बहुत सुंदर हैं... दि‍लबाग़ जी

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  9. जबरदस्त प्रस्तुति.

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  10. वाह: बहुत सुंदर हाइकु

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  11. wah ----
    bahut hi achhe ---sabhi ek se ek badh kar hain ----
    badhai
    poonam

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  12. yad to hoti hi aesi hai aap chahen na chahen aa hi jati hai
    rachana

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