Monday 2 July 2012

दोहाइकू

हालत अपने देश की
श्वेत गिद्ध तन नोच रहे हैं
पीर अथाह स्वदेश की।

सुन्दरि! तेरे गाँव में
तन मन शीतल हो जाता है
नीम की ठंडी छाँव में।

नदिया का हियरा फटा
बड़ी बड़ी हैं पड़ी दरारें
भूल गयी काली घटा।

तन मन जलते ताप में
तू चाहे हो जाएँ शीतल
भरी चांदनी आप में।

4 comments:

  1. नदिया का हियरा फटा
    बड़ी बड़ी हैं पड़ी दरारें
    भूल गयी काली घटा।

    तन मन जलते ताप में
    तू चाहे हो जाएँ शीतल
    भरी चांदनी आप में।

    सुन्दर और सटीक वाह सुरेन्द्र जी वाह!

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  2. अच्छी क्षणिकाएँ , लेकिन हाइकु नहीं
    हाइकु --------- 5, 7, 5, वर्ण का क्रम है

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  3. यह छंद हाइकू नहीं बल्कि दोहाइकू है जिसमे मात्रा क्रम १३,१६,१३ है | मैंने शीर्षक में दोहाइकू लिखा भी था जिसे शायद ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हाइकू कर दिया गया |

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