Monday 9 July 2012

पावस गीत

झीनी झीनी पड़त री फुहार अँगना।

सखी अमवा की डार, पड्यो हिंडोला बहार,
उड़े अंचरा हमार, कब अइहैं सजना।

गए हमका भुलाय, दीन्ह्यो पतिया पठाय,
बांचौं हिया सो लगाय, बरसि रह्यो नयना ।

जाहु कागा वहि देश, कह्यो पिया सो सँदेश,
जरै सजनी तुहारि, कारे भयों धुअना।

3 comments:

  1. आप की सभी प्रस्तुतिया
    कुछ अलग हट के हैं ||
    सादर बधाई स्वीकारें ||

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  2. मिटटी से जुडी रचना,
    बहुत सुन्दर...:)

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  3. वाह बहुत सुन्दर रचना! क्या बात है सुरेन्द्र जी

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