Friday, 13 July, 2012

भारतीय शिक्षा पद्धति, यहां की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत तथा यहां के गौरव का लोहा मानते हुए लार्ड मैकाले की ब्रिटिश पार्लियामेंट में 2 फरवरी 1835 को दी गई कूटनीतिक स्पीच

हिन्दुस्तान में अंग्रेज़ी भाषा के प्रयोग को लेकर एक फ़ेसबुकीय परिचर्चा में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हमारे सीनियर श्री सुमन्त भट्टाचार्य जी ने इंग्लैण्ड में दिये गये लार्ड मैकाले एक एक भाषण को उद्धृत किया कृपया आप सब भी उस भाषण को पढ़ें और सोचें कि आधुनिक भारतीय शिक्षा पद्धति को किस साज़िश के तहत यहां लागू किया था मैकाले ने जिसे हम आज ब्रह्मवाक्य समझकर अपनाए हुए हैं-



रूपरेखा चित्र
ग़ाफ़िल भैया! हम कहां चूके? आज की भारतीय शिक्षा नीति, जिस पर हम गर्व कर रहे हैं और जो केवल लार्ड मैकाले की देन है, इस मुद्दे पर मैकाले की एक स्पीच लगा रहा हूं, जिसमें क्या कहा गया? ..आप भी इस पर विचार कीजिए!
Lord Macaulay’s address to the British Parliament in 2 February, 1835:

     "I have traveled across the length and breadth of India and I have not seen one person who is a beggar, who is a thief. Such wealth I have seen in this country, such high moral values, people of such calibre, that I do not think we would ever conquer this country, unless we break the very backbone of this nation, which is her spiritual and cultural heritage, and, therefore, I propose that we replace her old and ancient education system, her culture, for if the Indians think that all that is foreign and English is good and greater than their own, they will lose their self-esteem, their native self-culture and they will become what we want them, a truly dominated nation."
     Henry Kissinger,the time of the turkish invasion in Cyprus, while addressing a group of Washington, D.C. businessmen in Sept.1974: "The Greek people are anarchic and difficult to tame. For this reason we must strike deep into their cultural roots: Perhaps then we can force them to conform. I mean, of course, to strike at their language, their religion, their cultural and historical reserves, so that we can neutralize their ability to develop, to distinguish themselves, or to prevail. Thereby removing them as an obstacle to our strategically vital plans in the Balkans, the Mediterranean, and the Middle East, to all this neuralgic territory of great strategic importance for us, for the politics of the USA." Does not both sound similar? Two great nations, which once were the greatest of the greats in their spheres of influence falling prey to a strategy aimed at their culture?
Country: India

8 comments:

  1. और इस तरह हम उनके बनाए जाल में फंसते चले गए इस तरह की आज तक निकल नहीं सके अब तो ये स्टेटस सिम्बल भी हो गया

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    1. अनजाने इसे अपनाकर हम क्या थे और क्या होते जा रहे हैं राजेश कुमारी जी यही विचारणीय प्रश्न है फिर भी उसी का गुणगान

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  2. angrejon ki kootneeti tatha bharteey chatukarita ne desh ki sanskriti pr gahara aghat kiya hai .....mahatavpoorn prastuti hetu sadar abhar .

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    1. इस पर सोचा जाना चाहिए नवीन जी! यह साजिश गम्भीर मसला है इसे आप जितना हो सके और जहां हो सके जैसे फ़ेसबुक, ट्वीटर आदि सोशल साइटों पर शेयर करें

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  3. आज़ाद होते हुए भी हम आज़ादी क्यों नहीं महशूस कर पा रहे हैं? क्यों हमारे शासकवर्ग किसी अंग्रेज ऑफिसर से बेहतर व्यवहार हमारे साथ नहीं करते यह सब इसी शिक्षा पद्धति का नतीज़ा है

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  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (15-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  5. मैकाले जानता था और इसी लिये उसने भारत की रीढ़ उसकी शिक्षा पद्यति पर वार किया और उसे हम आज भी ढो रहे हैं बार बार खुद ही तोड़ रहे हैं ।

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