Sunday 15 July 2012

नयन ( हाइकु )


प्रेम का पथ 
पहुंचे दिल तक 
नयन द्वार।

लोग क्या जानें
नयनों के वायदे 
दिल ही माने।

नयन प्यासे
स्वाती बूँद पा जाते 
तुम जो आते।

दिल समझे
नयन बोल रहे 
प्यार महके।

पतझड़ था 
नैना से नैना मिले 
गुलाब खिले।

नैना बरसे 
दर्शन को तरसे 
तुम न आए।

है ये दर्पण 
जो देखना हो मन 
देखो नयन।

दिखता वही 
जो देखना चाहते 
नैन न दोषी।
            
----------------दिलबाग विर्क 
****************

13 comments:

  1. उम्दा हाइकु.....

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  2. वाह....
    बेहतरीन हायकू...

    सादर
    अनु

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  3. नयनो की हो बात,बात मानते नयना
    ना मानो गर बात,छिन जाये चायना,,,,,,,

    RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...

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  4. क्या बात है वाह!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि दिनांक 16-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-942 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  5. दो नैनों के द्वार से, सीधा करते वार।
    इस जापानी छन्द की, तीखी होता मार।।

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  6. दिलबाग दिल को करते जो बाग बाग
    आज नयन में आ गये हैं
    वहाँ भी एक सुंदर बाग खिला गये हैं ।

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  7. वाह बहुत सुन्दर
    बेहतरीन हाइकु
    :-)

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