Wednesday 18 July 2012

एक नज़र इधर भी! : एक फ़ेसबुकीय परिचर्चा

रूपरेखा चित्र
Balendu Dwivedi
     बहनों और भाइयों! कई दिनों से मेरे दिलो-दिमाग में एक संवैधानिक प्रश्न कौंध रहा है. प्रश्न यह है कि आख़िर आज़ादी ने हमें क्या दिया? एक अदना सा संविधान! और उसमे में गिन कर पांच-छः मौलिक अधिकार! फिर दिनों-दिन इन अधिकारों पर नई-नई पहरेदारी! यही न! सवाल यह है कि आज हमारी आबादी सवा करोड़ को पार करने को बेताब है और हमारे पास अधिकारों के नाम पर वही पुरानी छः आकृतियाँ! क्या यह न्यायसंगत लगता है? आख़िर आज जब हर तीसरा आदमी नए -नए अधिकारों को ईज़ाद करने और उनका रियाज़ करने में लगा हुआ है तो क्यों न इन सभी अधिकारों को संवैधानिक मान्यता दी जाये!
मैं इनमें से कुछ गिनाने की कोशिश करूँगा बाक़ी आप जोड़िए-
(१) पेट पर लात मारने का अधिकार
(२) चोरी के बाद सीनाजोरी का अधिकार
(३) काम बिगाड़ के दाँत निपोरने का अधिकार
(४) सरेआम मुँह पर थूकने का अधिकार
(५) प्रतिवाद करने पर 'दुई' बम मारने का अधिकार
(६) हमाम के बाहर नंगे दिखने का अधिकार
(७) घोटाले का अधिकार
(८) सज़ायाफ्ता को क़ानून में संशोधन का अधिकार
(९) न्याय मांगने पर दण्डित करने का अधिकार
(१०) सभी सम्मानित नागरिकों को सुबह-सवेरे जूता मारने का अधिकार आदि-आदि.
     ये सभी अधिकार समाज के उन विशिष्ट महात्माओं के अनुभव के आधार पर संकलित किये गए हैं जिन्होंने आज़ादी के बाद से ही इस भाव का खूब रियाज़ किया है. आज़ादी उनके रग़ों में बुरी तरह घुसपैठ कर उनको संक्रमित कर चुकी है. ससुरी! ठहरने का नाम ही नहीं लेती निरंतर दौड़ती रहती है...! और ये महात्मा भी इसके ख़ूब आदी हो चुके हैं. इसीलिए जब इस पर कोई रोक लगाने की बात चलती है तो वे अनायास ही आक्रामक हो जाते हैं बल्कि यों कहें कि पाजामे के बाहर हो जाते हैं.
 ·  ·  · शुक्रवार को 17:14 बजे

  • आपको, Yogesh Pratap SinghSumita KamthanSumant Bhattacharya और 8 और को यह पसंद है.

    • Rajani Kant Singh बहुत खूब बालेंदु ....विशिष्ट महात्माओं को संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए आपने जो बीड़ा उठाया है उससे आप आंबेडकर की श्रेणी में खड़े हो गए हैं...आज की व्यवस्था पर अच्छा कटाक्ष है


    • Sumita Kamthan Good comments.... Balendu kya ek bar 100 years ke liye Army Rule recommend kiya jaye..... wakai zururak to lag rahi hei.....


    • Balendu Dwivedi ab to lalla ke bade-buddhijeevi hi ispar faisla dein,to behtar hoga...


    • Sumita Kamthan aree faisla kyun abhi to suggestions ki hi bat hei abhi to bat shuru hi hui hei mai to sochti hun Balendu ki yade hamare desh ko azadi milne ke sath hi sath 100 years ka Armi rule laga diya jata to kam se kam line of action to steek mil jata shayad sthiti itne gambheer na hoti.... in my opinion!!


    • Balendu Dwivedi bilkul sahee kaha aapne..kuchh naye adhikaar jodna chahein to jod sakti hain aap..


    • Balendu Dwivedi gaafil sir! swagat hai.'aam' ka prabandh keejiye.sumant sir bhi aa rahe honge..!!


    • Chandra Bhushan Mishra Ghafil अच्छा कटाक्ष

      शुक्रवार को 18:41 बजे मोबाइल के द्वारा ·  · 1

    • Balendu Dwivedi nripendra sir..!! aap bhi apne anubhav se kuchh naye adhikaaron se roobru karaaiye...


    • Chandra Bhushan Mishra Ghafil यार बालेन्दु भाई आम की बात करि रहे हो बगिचवै लै आवें का इहाँ? एक दू से तौ काम चलै वाला नहीं है चौराहे पर

      शुक्रवार को 18:48 बजे मोबाइल के द्वारा ·  · 1

    • Kunwar Anirudh Pratap Singh कभी कभी अक्ल वाले भी, लुट जाया करते हैं,

      समझदारी देश में अब बेईमानों ने खरीद ली है.


    • Kunwar Anirudh Pratap Singh बंद होंठों में छुपा लो 

      ये हँसी के फूल 
      वर्ना रो पड़ोगे।


    • O.p. Singh is desh me adhikar chetna jis gati se viksit huyi hai.usi gati se kartavyabodh ka hraas huwa hai.


    • Sumita Kamthan adhikar to kartavyaparayanta me hi nihit hote hein is tathye ko samajhna ki aavshyakta hei.

      शुक्रवार को 21:16 बजे मोबाइल के द्वारा ·  · 2

    • Vinay Mishra uper sabke vichro se awgat hone ka awsar mila, achha laga. Sumita Kamthan Mam ka ye salah ki 100yrs tak ARMY rules is not good. Ha aagar sachmuch kuch yesa karna hai to 2yrs National Service means 10th ke bad (jaha jindagi ka mod jyada lachili hoti hai) everybody should go for 2yrs Basic Military Training and wahi se +2 bhi pass kare jisme use sari samwidhan ka thora gyan, yek achi road sence ka gyan, adhikar ka pata chalega. fir to max log ki soch yek jaisi hogi and Desh Rules Life style sab change nazar aayega and aapke pas reserve me duniya ki sabse badi ARMY back up ke liye hogi fir China ke harek sal border badhane pe chup nahi rahna hoga...


    • Sumita Kamthan Oh wah...cha gaye Vinay aap to Singapore me bhi yahi system hei National Service wala this is really a fantastic idea i appreciate your view point Vinay. Well said. I like it.

      13 घंटे पहले मोबाइल के द्वारा ·  · 1

    • Shweta Mishra Vinay Mishra ji I found your suggestion valuable . . . if we could inculcate these values in our youngsters, a process of 'systems thinking' will be automatically initiated in our society.

      12 घंटे पहले ·  · 2

    • Vinay Mishra ‎@Sumita Kamthan Shweta Mishra: mam thanks, ab laga ki sayad mai yekela ulti sidhi bat karnewala insan nahi hu kuch or log bhi mere vicharo se sahmat hai........... nahi to aksar logo ko ye batana kathin hota hai wo wohi bate sunana chahte hai jo unhe pasand hoti hai...

      10 घंटे पहले ·  · 1

    • Sumant Bhattacharya बालेंदु मैं आपकी इस बात से सहमति नहीं जता पा रहा हूं कि संविधान अदना सा है। हां, संविधान को परिभाषित करने की जो हरकत की जाती है वह बेहद निराशाजनक है। एक बड़ा हथियार आजाद भारत को 2005 में मिला..सूचना का अधिकार। जिसे मैं लोकपाल से बड़ा हथियार मानता हूं। लोकपाल यदि सिर्फ शिकायत. जांच और दंड का प्रावधान भर है तो सूचना का अधिकार शासन में आम नागरिक की हिस्सेदारी और प्रशासन की जवाबदेही भी तय करता है। मेरा यह भी मानना है कि आने वाले कुछ सालों में सूचना का अधिकार देश के नागरिकों का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक हथियार साबित होगा। आमीन

      9 घंटे पहले · सम्पादित ·  · 4

    • Vinay Mishra Sumant Bhattacharya: sir, mai aapse sahmat hua ki Sambidhan ka dayara kafi bada hai, lekin mere hisab se mul karan hai ki hum sab school me maths or wohi purani education system ( jiske bare me aapne bataya tha ki Gore kaise & kyo change karna chahte the) se yek achha clerk bana rahe lekin achha hota aagar useme thoda basic adhikar,sambhidhan,driving theory,manner..... bhi padha ke acha insan banany ki kosis karte. how many people knows basics about Samwidhan & Nagrik Adhikar? but every Indian knows about maths..

      9 घंटे पहले ·  · 2

    • Shweta Mishra विनय जी आप की बातों में दम है . . . काश इन बातों को कपिल सिब्बल जी या विनीत जोशी जी सुन रहे होते और समझ भी पा रहे होते तो कितना अच्छा होता . . . भारतीय शिक्षा व्यवस्था किसी कॉपी पेस्ट मॉडल पर नहीं चल रही होती आज.

      9 घंटे पहले ·  · 2

    • Sumant Bhattacharya विनीत भी इलाहाबाद का निकला छात्र है..उसे जबरिया मनवाया नहीं तो सुनाया जरूर जा सकता है..

      8 घंटे पहले ·  · 1

    • Shweta Mishra विनीत जोशी जी को जबरिया तो कई बार, कई बातें ज़रूर पूछी और सुनाई हैं (जब जब मुलाकात हुई है उनसे ) लेकिन यही महसूस हुआ सर हर बार . . . कि शिक्षा व्यवस्था की नकेल उनके ज़रिये किसी और ने थामी हुई है . . .

      8 घंटे पहले ·  · 1

    • Sumant Bhattacharya यकीनन..श्वेता मैं आपकी बात से सहमत हूं..विनीत जोशी सिर्फ व्यवस्था के औजार भर हैं..नकेल तो कपिल सिब्बल के हाथों में ही है। प्रो. यशपाल की टीम ने देश भर के तमाम संस्थाओं का दौरा कर पाया था कि ज्यादातर संस्थाएं बेकायदा चलाई जा रही है, लेकिन टीम का मकसद सिर्फ हायर एजूकेशन पर रिपोर्ट देना था सो रिपोर्ट में इन हासिल जमीनी सूचनाओं को जगह नहीं दी गई...अफसोस..

      8 घंटे पहले · सम्पादित ·  · 3

2 comments:

  1. भाई साहब सारे संविधानिक और गैर -संविधानिक अधिकार
    ये कथित महात्मा पहले ही हथियाए पड़े हैं अब तो सिर्फ तिहाड़ जेल को आरक्षित क्षेत्र बनाना बाकी है .

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  2. सभी को सेकुलर होने सेकुलर खाने ,सेकुलर ओढने का अधिकार भी दिया जाए .

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