Sunday 29 July 2012

बिटिया ( दोहे )


बाँहे फैलाए तुझे , बिटिया रही पुकार
तुम जालिम बनना नहीं , मांगे हमसे प्यार  |

निश्छल , मोहक , पाक है , बेटी की  मुस्कान 
भूलें हमको गम सभी , जाएं जीत जहान |

क्यों मारो तुम गर्भ में , बिटिया घर की शान 
ये चिड़िया-सी चहककर , करती दूर थकान | 

बिटिया कोहेनूर है , फैला रही प्रकाश 
धरती है जन्नत बनी , पुलकित है आकाश |

तुम बेटी के जन्म पर , होना नहीं उदास 
गले मिले जब दौडकर , मिट जाते सब त्रास |

                     --------- दिलबाग विर्क  

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14 comments:

  1. सुन्दर...
    बहुत सुन्दर दोहे....

    सादर
    अनु

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  2. निश्छल , मोहक , पाक है , बेटी की मुस्कान
    भूलें हमको गम सभी , जाएं जीत जहान |

    Nice.

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  3. सटीक बात कहते सुंदर दोहे

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  4. बिटिया पर दोहे लगे,मुझको सभी सटीक.
    भ्रूण हत्या पर एकदम,लगा निशाना ठीक.

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  5. बिटिया सही में कुदरत का सुंदर उपहार है ...
    सुंदर दोहे !

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  6. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 30-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-956 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  7. तुम बेटी के जन्म पर , होना नहीं उदास
    गले मिले जब दौडकर , मिट जाते सब त्रास |

    लाजबाब प्रस्तुति सुंदर दोहे,,,,,,

    RECENT POST,,,इन्तजार,,,

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  8. बेटियों के बारे में बहुत ही अच्छे भाव लिए हुए दोहे बहुत ही अच्छे लगे !
    काश सभी ऐसा सोचे ......

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  9. बहुत बहुत बहुत सुन्दर दोहे है और उससे सुन्दर उनमें छिपे भाव |
    बेटी के बिना घर सूना होता |
    जैसे ही मिले स्नेह दूना होता |
    आशा

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  10. बेटी है प्यार और प्रसन्नता की खान !

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  11. बहुत बहुत सुंदर !
    'बेटी जीवन का सार, बेटी माथे का गुरूर...
    बेटी धड़के दिल में हरदम...हो चाहे कितनी दूर...'
    ~सादर !!!

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  12. तुम बेटी के जन्म पर , होना नहीं उदास
    गले मिले जब दौडकर , मिट जाते सब त्रास
    bilkul sahi likha hai.....

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  13. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  14. बहुत सुन्दर दोहे

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