Monday 30 July 2012

चारों ओर   फैली हुई  आग  अलगाव की है, 
ऐसा करो   ज्योति    देशप्रेम की  जगी रहे |
एकता   के   सूत्र  में  बंधा रहे  समूचा देश ,
प्रेमरस   में   सदा   मनुष्यता    पगी   रहे |
स्वार्थ के पुजारियों को बकवेशधारियों को,
जड़   से   मिटा दे  देख  दुनिया   ठगी रहे |
ज्योतिपुंज! ऐसी ज्योति जिंदगी को दे दे,
सदा  लेखनी हमारी  देशहित में लगी रहे | 

5 comments:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ..... काश ऐसा हो पाये ।

    ReplyDelete
  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार को ३१/७/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी आपका स्वागत है

    ReplyDelete

लिखिए अपनी भाषा में

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...