Sunday, 5 August, 2012

अन्ना का अनशन और राजनीतिक घोषणा : एक फ़ेसबुकीय परिचर्चा

अण्णा ने अनशन समाप्त कर दिया, कहीं पहले पढ़ी कुछ पंक्तियां इस पर याद आ गयी--
राजा रावण हो या राम---जनता सीता है---एक ने बनवास से चोरी की दूसरे ने अग्नि परीक्षा के बाद बनवास दिया |
राजा कौरव हो या पांडव---जनता द्रौपदी है---एक ने चीर हरण किया दूसरा जुए में हार गया |
राजा हिंदू हो या मुसलमान---जनता लाश है---एक जला देता है दूसरा दफना देता है |

  • आपको, Alok SinghDivyendra Shekhar GautamShailendra Pratap Singh Mantoo और 26 और को यह पसंद है.

    • Vinay Pratap 
      सर एक बात कहूँ, कल तक जब मै ये कहता था कि इस आन्दोलन के द्वारा हम इस देश को भ्रष्टाचार के कुछ मुक्ति दिला पाएंगे तो लोग मुझे इस आन्दोलन की हज़ार खामियां बताते थे. आज जब मै हार मानने को तैयार बैठा हूँ और कुले आम कहता हूँ कि इस देश से भ्रष्टाच...


    • Ajay Upadhyay ek jala deta hai, doosra dafna deta hai..

    • Nripendra Singh vinay, ye andolan janataa ka hai isliye ye samapt nahi ho sakata hai.

    • Vinay Pratap एक बार जे ज्यादा लाईक नहीं कर सकता अन्यथा कम से कम सौ लाईक तो कर ही देता.

    • Shanti Bhushan Chaubey ‎@nripendra sir wakai me agar option hota to mai bhi millions time like kar deta.............ek moti kitab likhakar bhi iss tarah se janta ke halat bayan nahi kiya ja sakta .......impressed sir....

    • Shanti Bhushan Chaubey Anna team will be very pragmatic if they form a political party to curve corruption instead of conducting ineffective ANSHAN...

    • DrShailendra Singh Nripendra sir pranam,atisunder!!!!!

    • Rajani Kant Singh क्या बात है सर

    • Amitabh Singh Surendra Sharma??

    • Chandra Bhushan Mishra Ghafil 
      Nripendra Singh सर प्रणाम! मैं तो नहीं ही मान सकता कि भ्रष्टाचार निवारण का आन्दोलन भारतीय जनता का ही है वास्तव में यह आन्दोलन कुछ गिने-चुने बुद्धिजिवियों का है जो जनता (जिसकी परिभाषा केवल अंधी और छुद्रस्वार्थी भीड़ के रूप में की जा सकती है)
      को बरगला कर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं, सत्ता किसे प्यारी नहीं होती येन केन प्रकारेण साध्य को सिद्ध करना बुद्धिमानी है और वे यह काम बख़ूबी कर रहे हैं उन्हें मैं ग़लत नहीं मानता क्योंकि वे 'शठे शाठ्यम्‌ समाचरेत' सिद्धान्त का पालन कर रहे हैं। पहले यह साबित हो जाय कि भ्रष्ट कौन है फिर भ्रष्टता हटाने की तरकीब की जाय तो कुछ बात बने इसके पहले सारा प्रयास बेमानी है। मैं तन्त्र को भ्रष्ट नहीं मानता सबसे बड़ी भ्रष्ट तो जनता ख़ुद है यही भ्रष्टता की नानी है। जब जनता अपने मत का मूल्य रूपये में वसूल करेगी तो उसी मत के दम पर पैदा हुआ राजा हरिश्चन्द्र, कर्ण और युधिष्ठिर नहीं होगा। हम ऐसी व्यर्थ अपेक्षा क्यों करें। नृपेन्द्र सर! आज के दौर में आइए किसी चुनाव के दौरान गाँवों में तो अनायास जान जाइएगा कि चतुर (भ्रष्ट) जनता अपने एक मत की क़ीमत कितनी और कितनों से वसूलती है! भ्रष्टाचार की लड़ाई दिल्ली के मैदानों पर तन्त्र के ख़िलाफ़ लड़कर नहीं जीती जा सकती। उसके लिए भारत के गाँवों से अलख जगानी होगी। हाँ दिल्ली के मौदानों पर सत्ता हासिल करने के जंग की शुरुआत की जा सकती है जैसा कि भाई लोग कर ही रहे हैं एक सीधे-सादे वृद्ध को सिम्बल बनाकर...इति वार्ता
      बीते कल 02:16 बजे मोबाइल के द्वारा · सम्पादित ·  · 7

    • Chandra Bhushan Mishra Ghafil Nripendra Singh सर अपने उपर्युक्त कथन की पुष्टि हेतु मैं एक लिंक साझा करना चाहता हूं जो है तो व्यंग्य माध्यम में लिखा पर सत्य और अनुभूत है शालिनी पाण्डेय जी का यह लघु आलेख-




      besurm.blogspot.com

      वाह शालिनी जी! क्या धोया है जनता को बहुत सही। आपके इस अतिसुन्दर पोस्ट का लिंक जागरण जंक्शन डॉट कॉम पर भी है। सूचनार्थ

    • Chandra Bhushan Mishra Ghafil विशेष रूप से Nripendra Singh सर,Shailendra Pratap Singh सर, Vibhas Awasthi सर, Dhirendra P Singhसर प्रभृति विद्वानों से अपनी उपर्युक्त टिप्पणी पर राय चाहूँगा ताकि अपने अनुभव में कुछ और जोड़ सकूं सिद्धान्त रूप में ही सही

      मैं गाफिल भाई की एक टिप्पणी के उत्तर में यह पोस्ट लगा रहा हूँ. यह पोस्ट लगाने का एकमात्र कारण यह है कि हममें से कौन संभावित विकल्प को किस दृष्टि से देख रहा है, यह जाना जा सके. 

      गाफिल भाई, मैं देर से आया, इसका खेद है, आज के दौर में प्रत्याशी के चुनाव में आपके पास विकल्प बहुत सीमित हैं, जब कई भ्रष्टों में से एक को चुनना मजबूरी हो तो जनता यदि अपने मत का मूल्य ले रही है तो यह निंदनीय तो है पर अकल्पनीय या अप्रासंगिक नहीं. 
      सबसे पहले ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करना होगा कि जन-सामान्य भी प्रत्याशी हो सकने का साहस कर सके. हममे-आपमें से कितने हैं जो इतना धन व्यय कर सकने की क्षमता रखते हैं जो चुनाव लड़ सकें. 
      मैं यही सोचता हूँ कि यदि जनता को विकल्प मिलेगा तो वह अपने तात्कालिक नहीं दीर्घकालीन हितों को देखते हुए मतदान करेगी. इस सत्य का हम आप 1977 में अनुभव कर चुके हैं. तब भी अमेठी में धन का अम्बार लगा था पर क्या परिणाम रहा ?
      आज पुनः एक विकल्प सामने आ रहा है, भविष्य फिर कुछ सुखद अनहोनी को सम्भव बनाने वाला है, इसकी मुझे पूरी आशा है. 
      इस पोस्ट को एक सर्वेक्षण के रूप में लिया जाय तो उचित होगा, सभी सम्मानित सदस्यों से अनुरोध है कि तर्कों की कसौटी पर कसने के उपरान्त अपना मंतव्य अवश्य दें.

      अनुवाद देखिए
       ·  ·  · बीते कल 12:39 बजे

      • आपको, Jyoti MishraAmitabh SinghDivyendra Shekhar Gautam और 10 और को यह पसंद है.

        • Arun Jaihind जुगनूओं तुमको नए चाँद उगाने होंगे...

          इससे पहले कि अंधेरों की हुकूमत हों जाये.
          बीते कल 12:46 बजे ·  · 7

        • Chandra Bhushan Mishra Ghafil 
          सर मैं आपसे सहमत हूँ पर 'चुनाव लड़ना सबके वश का नहीं' इस परिस्थिति के जिम्मेदार कौन हैं चलिए यह भी सही कि कोई हो पर जो मुफ़्त का लड्डू खाने की जनता की आदत पड़ गयी है वह चन्द मसीही नामों के दम पर छूट जाएगी इसका सहज यक़ीन करना फिलहाल मेरे वश की ब
          ात नहीं। मेरा अपना मानना है सर कि गाँव-गाँव आन्दोलन चलाकर पहले जनता को जागरूक किया जाता उन्हें यह बताया जाता कि उनका दीर्घगामी हित किसमें है मुफ़्त के लड्डू मेँ या...और जनता जब समझ जाती तो वह अपना विकल्प स्वयँ खोजती यद्यपि यह समय और श्रम साध्य है पर स्थायित्वपूर्ण है। वर्ना जिस विकल्प को आज प्रस्तुत करने की चेष्टा की जा रही है वह केवल चन्द बुद्धिजीवियों द्वारा प्रस्तावित है न कि जनता द्वारा। मेरा फिर जोर होगा सर कि उपाय कुछ भी किया जाय उसके पहले जनता का सम्यक्‌ संस्कार नहीं किया गया तो कोई भी उपाय कारगर नहीं हो सकता नहीं होगा। आप शहर देख रहे हैं मैं गाँव देख रहा हूँ आज की भयावह स्थिति यह है कि चुनाव के मौसम ग्रामीणों के लिए उस त्योहार के मौसम के रूप में स्थापित हो चुके हैं जिसमें चहुँ ओर से धनवर्षा होती है आज की ग्रामीण जनता इसके मोह को आसानी से त्यागने को शायद तैयार नहीं होगी। विगत वर्षों में भ्रष्टाचार के निवारण हेतु जो प्रयास अन्ना टीम द्वारा दिल्ली के मैदानों में किया गया यही प्रयास जनता को संस्कारित करके जागरूक करने के लिए गावों में किया गया होता तो जो मसौदा आज वह टीम बनाकर विकल्प पेश करना चाह रही है यह विकल्प जनता ख़ुद पेश कर चुकी होती जिसमें सफलता की गारंटी थी। देखना सर भ्रष्टाचार निवारण हेतु एक न एक दिन दिल्ली छोड़कर भारतीय गाँवों में आना ही आना होगा जहाँ उसकी जड़ है
          बीते कल 13:32 बजे मोबाइल के द्वारा ·  · 6

        • Chandra Bhushan Mishra Ghafil शैलेन्द्र सर आप 77 की बात कर रहे हैं तब की और अब की मानसिकता में जमीन आसमान का अन्तर है। तब के लोगों में आत्मसम्मान आत्मगौरव तथा त्याग की भावना का स्तर अब के अपेक्षा बहुत ऊँचा था। उच्च मूल्यों के बावत तब के और अब के लोगों में कोई तुलना ही नहीं
          बीते कल 13:41 बजे मोबाइल के द्वारा · 

        • Virendra Pratap Singh ‎77 ki lahar ke tatkalik karan aapatkalv nasbandi thi jisne aam janta ko seedhe pravavit kiya tha
          बीते कल 13:47 बजे ·  · 4

        • Shailendra Pratap Singh गाफिल भाई, वो जागरण तो शुरू हो चूका है बस गति अभी मन्द है और 2014 तक तो बहुत पानी बह चूका होगा. और एक आवश्यकता ने अराजनीतिक से राजनीति में ला दिया तो बाकी कार्य भी आवश्यकता पड़ने पर स्वाभाविक रूप संपन्न होंगे. अभी तो ये अंगड़ाई है.

          मत भूलिये
           रूस की जारशाही केवल एक लेनिन के प्रयास और जनसामान्य की भावना से ध्वस्त हो गयी. इतिहास साक्षी है, सत्कार्य की प्रवृत्तियां कुछ काल के लिए दबाई तो जा सकी हैं पर समाप्त नहीं हुईं. हो सकता है कि कई अन्ना और खप जाएँ पर अब इस आन्दोलन का दमन कोई नहीं कर पायेगा.
          बीते कल 13:49 बजे ·  · 5

        • Chandra Bhushan Mishra Ghafil वीपी सर से पूर्णतया सहमत
          बीते कल 13:56 बजे मोबाइल के द्वारा · 

        • Chandra Bhushan Mishra Ghafil 
          शैलेन्द्र सर आपसे भी सहमत मैं कब से चिल्ला रहा हूँ 'जनभावना' । मुख्य यह है। परिस्थिति ऐसी निर्मित की जाती कि प्रेरक तत्व जनभावना होती तो क्या मज़े होते सर! आज उँगली उठाने की गुंजाइश न होती। मैं तो कहता हूँ कि जो वक़्त जायाँ हुआ दिल्ली के मैदा
          नों मे उससे सबक लेकर अब तो भागो जनता के बीच और जनता के मानस में छुपे राक्षस को मारने का जुगाड़ करो। शाखा को निशाना बनाने से चौगुनी शाखाएँ निकलती हैं भ्रष्टाचार के विशाल वृक्ष को नष्ट करना है तो जड़ को निशाना बनाओ!
          बीते कल 14:09 बजे मोबाइल के द्वारा ·  · 4

        • Virendra Pratap Singh 
          ‎77 ki lahar sarkari daman ke khilaf tha swatah isfurt tha,daman se north india jyada pravavit tha isliye north me hi congress buri tarah hari,parantu anna team apne is andolan ko sarkari daman ki sthiti tak le jane me asfal rahi. ab anna k...

          बीते कल 14:11 बजे ·  · 4

        • Saurabh Raj 
          sir, i remember that IIT passed out students also tried to make a polital party.its name was paritran,,anyways later they did not contested elections, team anna has decided to go for elections that is welcome step ,,today as we are in era ...

          बीते कल 14:17 बजे ·  · 5

        • Chandra Bhushan Mishra Ghafil वीपी सर ने एकदम हमारे मुँह की बात कही धन्यवाद सर!
          बीते कल 14:51 बजे मोबाइल के द्वारा ·  · 2

        • Chandra Bhushan Mishra Ghafil हमें याद है सर कि हमारे एक रिश्तेदार को 77 में सरकारी नौकरी से इसलिए इस्तीफ़ा देना पड़ा था कि उन्होंने नशबन्दी नहीं करवाई जबकि वे तीन बच्चे के पिता थे
          बीते कल 14:57 बजे मोबाइल के द्वारा ·  · 4

        • O.p. Singh stage par khoobsurat performance dene wali nartaki ke nritya par khoob jhoomkar taliyan bajane wale, usase shadi ke prastav ko sire se khariz kar dete hai.
          बीते कल 15:08 बजे ·  · 5


        • Rajesh Singh अग्रजोँ को सादर प्रणाम निवेदन! 

          सर 'अति की इति' प्रकृति का शाश्वत नियम है और शायद प्रकृति इस समय सम्पूर्ण जगत मेँ इसदिशा मेँ सक्रिय है परिणामस्वरुप सर्वत्र क्राँतियाँ रेल के डिब्बे की तरह आकर हमेँ झकझोर रही हैँ। परिवर्तन के इस ऐतिहासिक क्ष
          ण मेँ देश के हर नागरिक को मातृभूमि का ऋण चुकाने के लिए कृतसँकल्पित होना होगा! व्यवस्था परिवर्तन की यह लड़ाई मात्र अन्ना और उनकी टीम की नहीँ है बल्कि देश के हर नागरिक की है। इसे गाँव-गाँव जन-जन तक पहुँचाने का बीणा हर समझदार व्यक्ति को उठाना होगा। जनजागरूकता का एक सघन अभियान चलाने के लिए खासकर युवाओँ को जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी और उसके लिए वो तैयार भी हैँ। एक बात और कि आने वाली पीढ़ी जब हमसे पूछेगी कि ऐसे ऐतिहासिक क्षण मेँ आप क्या कर रहे थे तो हमेँ नजरेँ नीची करनी पड़ेँ। इस तथ्य को हमेँ नहीँ भूलना चाहिये कि...."अनाचार बढ़ता है तब, सदाचार चुप रहता जब" ....सादर
          बीते कल 15:31 बजे मोबाइल के द्वारा ·  · 3

        • Saurabh Raj O.p. Singh ..aapki bat samajh mein nahi aayi...zara explain kar dijiye..
          बीते कल 15:36 बजे ·  · 2

        • O.p. Singh aap jaisa buddhijivi na samajhe ho nahi sakta.
          बीते कल 15:38 बजे ·  · 1

        • Saurabh Raj sir,, nartaki kis ko kaha aapne??????
          बीते कल 15:39 बजे ·  · 2

        • O.p. Singh team-tom ko
          बीते कल 15:40 बजे ·  · 2

        • Atul Chaturvedi 
          Shailendra Pratap Singh sir, mera vichar hai chahe wo rajniti ho chahe vyapar ya sarkari job athwa koi aur kshetra achche aur bhrasht vyakti sab sthano par hain.ham mein se kitne log aise honge jo train main reservation na hone par T.T. k
          o paise dekar seat pane ka prayas nahi karenge,athwa bazar se saman lene par ye sunishchit karte hain ki is par tax kata hai ya nahi,apne bachcho ke admission ke liye sifarish ya anya prayas kadapi nahi karein ye sochane wale kitane vyaktio se ham parichit hain,samasya poore samaj main aa chuki chaaritrik girawat ki hai aur fir sabhi to iska hissa hain chahe wo ham aap main se hon ya rajniti ya jiwan ke kisi bhi kshetra se aur chahe koi bhi andolan se jude vyakti hon sabhi ki apni kamjoriyan hain,tathakathit majbooriyan hain,akaanchchayein hain aur" main swayam sahi hoon aur anya sab par prashna chinha" ye kahane athwa sabit karne ki kabliyatein hain.jab tak atmawalokan karke khud apne aap ko sahi karne ki nahi thani jayegi -sahi aur galat ki ye bahas anwrat roop se chalti rahegi jaisi ki aadi kal se jari hai(bhishma pitamah ke bhi Draupadi ke cheer haran ke waqt chup rahane ke apne ku-tark rahe honge) kyonki apni charitrik girawat ko sweekar karne ka sahas na tabke samaj main tha aur na aaj hi hai,raha sawal doosaron aur vyavastha ko dosh dene ka wo tab bhi diya ja raha tha aur ab bhi jari hai.

        • Saurabh Raj good, very nice atul sir....i agree with you...it is very easy to comment and very difficult to commit..we all blame system..but still there are people who work for it day and night to keep things fine. . our society and its norms shall be challenged..not the people..we all are human beings..prone to faults esp those which are norms in society....
          20 घंटे पहले ·  · 5

        • Atul Chaturvedi aur mera vichar hai ki samasya rajnitik dalo se nahi hal hone wali apitu atmawalokan aur atmashudhdhi se hal ki disha milegi
          19 घंटे पहले ·  · 4

        • Saurabh Raj Atul sir...aap to sant aurbindo ghosh ki tarah bol rahe hain....
          19 घंटे पहले ·  · 2

        • Atul Chaturvedi thanks Saurabh Raj yadi ye compliment hai to dhanyawad aur anyatha bhi apki baat saharsha sweekar hai.ha ha
          19 घंटे पहले ·  · 2

        • Saurabh Raj compliment hi hai sir......a
          19 घंटे पहले ·  · 3

        • Atul Chaturvedi thanks once again bhai Saurabh Raj
          19 घंटे पहले ·  · 2

        • Virendra Pratap Singh atul,baoot umda,aapne samaj ki sahi sthiti rakh di hai,vastva me aatmavlokan,aatmsuddhi ki avakshyakta hai
          19 घंटे पहले ·  · 3

        • Atul Chaturvedi dhanyawad sir,bas aap jaise seniors ke saanidhya main jo kuch seekha hai wahi bayan karne ka prayas kiya hai.
          19 घंटे पहले ·  · 3

        • Chandra Bhushan Mishra Ghafil आप शत्‌ प्रतिशत्‌ सही हैं अतुल जी!/सर! हम कन्फ़्यूज हैं आपको सर कहें या...! पर आज के भारतीय समाज को आत्मावलोकन के प्रति प्रेरित करने के लिए प्रेरक तत्व के रूप में हम आदरणीय अन्ना जी पर यक़ीन किए हुए थे लेकिन न जाने क्यूँ अब यह यक़ीन डगमगा रहा है लग रहा है अब वे महामना छुद्र साध्य हेतु साधन स्वरूप इस्तेमाल किए जा रहे हैं। काश! हमारा यह भ्रम भ्रम ही साबित हो सत्य का रूप न धारण करे इसी में समाज की भलाई है आमीन
          19 घंटे पहले मोबाइल के द्वारा ·  · 1

        • Atul Chaturvedi Chandra Bhushan Mishra Ghafil ji aadarniya anna ji atmawalokan ke liye kahan prerit kar rahe the wo sab to kah rahe the ki bas dosh vyavastha ka hai.yadi wo ye kahate ki "pahala paththar wo mare jisne paap na kiya ho jo papi naho" tab eemandari se kitane haath uthate ye dekhane main maja bhi aata aur haath uthane main bhi!
          18 घंटे पहले ·  · 2

        • Chandra Bhushan Mishra Ghafil मैं कल से यही चिल्ला रहा हूँ सर! कि तन्त्र से ज्यादा जनता भ्रष्ट है यही भ्रष्टाचार की नानी है यहाँ अलख जगाओ! सबसे ऊँची टहनी काट देने से वृक्ष नहीं समाप्त होने वाला उसकी जड़ काटो पर मेरी बात तो नक्कारखाने में तूती की आवाज़ ठहरी और एक तो मैं ग़ाफ़िल सर इसी पोस्ट पर मेरी सभी टिप्पणियाँ आप अवश्य पढ़ें और वह टिप्पणी भी पढ़ें जिसकी बावत यह पोस्ट डाली गयी तो मुझे ख़ुशी होगी
          18 घंटे पहले मोबाइल के द्वारा ·  · 1

        • Saurabh Raj Are we moving towards Gerontocracy, or Geniocracy???? it seems that people want Geniocracy but the options avilable are of Gerontocracy.........
          18 घंटे पहले ·  · 2

        • Chandra Bhushan Mishra Ghafil अतुल सर! मैं नृपेन्द्र सर की उस पोस्ट को ऊपर ले आया हूँ जिस पर मेरी टिप्पणी के बावत यह पोस्ट डाली गयी है सौरभ भाई! आप भी उसे पढ़ें
          18 घंटे पहले मोबाइल के द्वारा ·  · 1

        • Shailendra Pratap Singh Atul, मैं इसको एक दूसरे नजरिये से देखने का प्रयास कर रहा हूँ. सिस्टम को भीतर रह कर भी कुछ ठीक किये जाने का प्रयास किया जा सकता है. 

          श्री टी एन शेषन के पूर्व भी बहुत से मुख्य चुनाव आयुक्त हुए और व्यक्तिगत तौर पर उनमे से कुछ उनसे अधिक योग्य 
          और परिश्रमी रहे होंगे पर 1991 तक के मतदान को देख कर क्या हम यह कल्पना कर सकते थे कि देश में बूथ-कैप्चरिंगरहित चुनाव कभी संभव हो सकेंगे ? पर श्री शेषन ने व्यवस्था में रहते हुए उस असंभव को काफी सीमा तक संभव कर दिखाया.
          1. क्या दृढ़ इच्छाशक्ति का धनी किसी राजनीतिक दल का प्रमुख ऐसा नहीं कर सकता ? 
          2. क्या वह इच्छाशक्ति किसी ऐसे वर्तमान दल के प्रमुख में दिख रही है जो स्वयं बहुमत से सरकार बना सकने में सक्षम हो ?
          3. क्या ऐसे विकल्प की संभावना जनता को दिखे तो वह उसे नहीं चुनना चाहेगी ?
          अतुल, हर समाज में आत्मावलोकन और आत्मशुद्धि के गुणों से हीन लोग भी रहे हैं और भविष्य में भी होंगे,किसी समाज का प्रत्येक व्यक्ति भ्रष्टाचार के दुर्गुण से रहित हो, यह असंभव है. इसलिए केवल आत्मशुद्धि से ही इसका निवारण नहीं संभव है. भ्रष्टाचार की पूर्ण समाप्ति भी संभव नहीं है, पर क्या शासक ऐसा तंत्र नहीं दे सकते जिसमे भ्रष्टाचार न्यूनतम हो ? 
          तुमने टी टी का उदाहरण दिया, मैं मानता हूँ कि हममे से बहुत ऐसा करते हैं तो क्या इससे यह मन जा सकता है कि हम भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ सकने की पात्रता खो चुके हैं ? 
          अतुल, जिस दिन टी टी को यह भय हो जायेगा कि पैसे लेकर किसी को अनुचित लाभ पहुंचाने का फल निश्चित रूप से उसे दण्ड के रूप में मिलेगा, उसी दिन वह सुधर जायेगा और जनसामान्य भी तदनुसार अपनी यात्रा की योजना करने लगेगा. दण्ड की यह व्यवस्था शासन ही कर सकता है, 
          भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई के लिए बने वर्तमान तंत्र में कुछ रूपांतरण/ परिवर्तन वांछित हैं और वह शासक द्वारा ही किया जा सकता है.
          और जो भी दल जनता को इस रूपांतरण/ परिवर्तन का विश्वास दिला सकेगा, उसे विकल्प के रूप में जनता द्वारा चुने जाने की अधिक संभावना रहेगी. और आज उस विकल्प का आभास अन्य दलों की तुलना में अन्ना ज्यादा बेहतर दे पा रहे हैं.
          15 घंटे पहले ·  · 2


        • Atul Chaturvedi 
          Shailendra Pratap Singh sir,apki baat se kuch ansh tak sahamat hoon,lekin dal aur eemandari se chunav ladane wale bhi tab tak sahi arthon main safal nahi ho payenge jab tak ham janta kshetrawad,jatiwad,dharma aadi se oopar utha kar vote de
          ne ki nahi sochate,aakhir hamare pratinidhi bhi to hamari soch aur hamare samaj ka hi pratibimb hain.jahan tak aadarniya anna ka sawal hai wo das din pahale kah rahe the ki "Lokpal ya anshan ant tak" ab unaka vichar rajnitik dal ka hai,kal kya vichar hota hai uska intazar hai,baki jo baat wo kah rahe hain pratyaksh roop se us se to koi asahamat hai nahi kyonki bhrshtachar se nijat sab chahate hain,raha sawal tariko,aur irado ka to loktantra main sabke apne tarike aur vichar hote hain aur ye kewal samay batayega ki uski kasauti par kaun kitna khara utara.
          6 घंटे पहले ·  · 2


        • Shailendra Pratap Singh 
          atul, anna kaise hain yah gaun hai, jo issue hai uske prati kaun kitna sincere hai yah mahatvpoorn hai. kisi k dwara uthaye gaye issue ke bare me baat na kar yah kahna ki aap kya bhrashtachaar hatane ki baat kar rahe hain, aapke khilaf to c
          ase registered hai, yah kahna mudde ko hashiye par dalna hai. aur jahan tak vibhinn vaad se grast hokar vote dene ki baat hai, uske sambandh me kewal ek baat - jab bhi koi bada aur samvedansheel issue rahega to sare vaad gaun ho jayenge, aisa dekha bhi ja chuka hai. vaise yah saty hai ki samay hi bataayega.
          4 घंटे पहले ·  · 2

7 comments:

  1. जो भी हो स्वागतेय है यह कदम .कुछ स्वच्छ छवि वाले लोग सत्ता में आये ,एक आस जगे विशवास जगे जन मन में.फिर ये लोग संघर्ष करके आ रहें हैं .कोंग्रेसियों का इतिहास रहा है ये लोग पहले जेल गए हैं फिर भ्रष्टाचार किया ,चतुर सुजान है लालू जैसे पहले राजनीति में आये फिर चारा खाके जेल गए .अब जो आ रहें हैं अनशन करके निखरके तपके आ रहें हैं .उम्मीद पे दुनिया कायम हैं .अन्ना एक उम्मीद हैं ,किरण एक तूफ़ान हैं केजरीवाल एक ज़ज्बा हैं .

    ReplyDelete
  2. जनता अपने कर्मों के कारण ठेक भुगत रही है. सही और नेक आदमी को यह नेता कब चुनती है ?

    ReplyDelete
  3. इकसठ सठ सेठा भये, इक सठ आये और |
    वा-सठ सड़-सठ गिन रहे, लेकिन करिए गौर |


    लेकिन करिए गौर, चौर की चर्चा चालू |
    किस के सिर पर मौर, दौर चालू जब टालू |


    लाखों भरे विभेद, चुनौती बहुत बड़ी है |
    दुर्जन रहे खरेद, व्यवस्था सड़ी पड़ी है ||

    ReplyDelete
    Replies
    1. राष्ट्र कार्य करने चले, किन्तु मृत्यु भय साथ |
      लगा नहीं सकते गले, फिर ओखल क्यूँ माथ ?

      फिर ओखल क्यूँ माथ, माथ पर हम बैठाए |
      देते पूरा साथ, हाथ हर समय बढाए |

      आन्दोलन की मौत, निराशा घर घर छाई |
      लोकपाल की करें, आज सब पूर्ण विदाई ||

      Delete
    2. वोटर भकुवा क्या करे, वोटर जाति-परस्त ।
      बिरादरी को वोट दे, हो जाता है मस्त ।

      हो जाता है मस्त, पार्टी मुखिया अपना ।
      या फिर कंडीडेट, जाति का देखे सपना ।

      चले लीक को छोड़, हिकारत भरी निगाहें ।
      इसीलिए हैं कठिन, यहाँ सत्ता की राहें ।।

      Delete
    3. राहुल की खातिर करे, रस्ता अन्ना टीम ।
      टीम-टाम होता ख़तम, जागे नीम हकीम ।

      जागे नीम-हकीम, दवा भ्रष्टों को दे दी ।
      पॉलिटिक्स की थीम, जलाए लंका भेदी ।

      ग्यारह प्रतिशत वोट, काट कर अन्ना शातिर ।
      एन डी ए को चोट, लगाएं राहुल खातिर ।।

      Delete
  4. bhavishy ke liye achchhe sanket hain....kam se kam bhrashton ki jamaat ko kuchh na kuchh chot to jaroor pahuchegi...vyvastha behtar bhi ho sakti hai.

    ReplyDelete

लिखिए अपनी भाषा में

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...