Sunday 12 August 2012

रक्त दान ( दोहे )

सबसे बढकर दान ये , करो रक्त का दान 
होगा फिर संसार में , तुम्हारा गुणगान ।

जख्मी को जो रक्त दे , देता जीवनदान 
घायल इंसां के लिए , है वो तो भगवान ।

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21 comments:

  1. बहुत बढ़िया सन्देश परक दोहे

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  2. प्रेरक दोहों में छिपा,रक्त-दान का सार.
    ऐसे ही लिखते रहें, प्रतिदिन बारम्बार.

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  3. रक्तदान महादान !
    बहुत सुंदर !

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  4. उत्कृष्ट प्रस्तुति सोमवार के चर्चा मंच पर ।।

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  5. रक्त दान से बढ़कर,कोई बड़ा न दान
    जीवनदाता बनकर,बन जाता भगवान,,,

    RECENT POST ...: पांच सौ के नोट में.....

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  6. रक्त दान से बड़ा कोई दान नहीं ...
    सुन्दर दोहे ...

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  7. सन्देश परक बढ़िया दोहे...रक्त दान महा कल्याण..

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  8. रक्त दान को मानिये ,सबसे उत्तम दान
    किसी जरुरतमंद की , बच जाती है जान
    बच जाती है जान, रक्त फिर से बन जाता
    रक्त दान जो करे , कहाये जीवन - दाता
    खतरा बिल्कुल नहीं ,रक्तदाता के प्रान को
    सबसे उत्तम दान , मानिये रक्त दान को ||

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  9. रक्तदान बड़े ही कल्याण का कार्य है ..
    साभार !

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  10. sandesh yukht achhe dohe
    shubhkamnayen

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  11. बढ़िया एवं आवश्यक पोस्ट के लिए आभार आपका !

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  12. प्रेरक और अनुकरणीय क्षणिका या कहूँ वाक्य

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  13. nice presentation....
    Aabhar!
    Mere blog pr padhare.

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  14. sarthak samajik prayas ke liye badhai.........

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  15. दोहों में एक बड़ी बात को आपने साफ़ साफ़ कह दिया है .बढ़िया ,बहुत बढ़िया ढंग से .

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  16. .कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhaiदोहों में एक बड़ी बात को आपने साफ़ साफ़ कह दिया है .बढ़िया ,बहुत बढ़िया ढंग से .
    रविवार, 26 अगस्त 2012
    एक दिशा ओर को रीढ़ का अतिरिक्त झुकाव बोले तो Scoliosis
    एक दिशा ओर को रीढ़ का अतिरिक्त झुकाव बोले तो Scoliosis

    कई मर्तबा हमारी रीढ़ साइडवेज़ ज़रुरत से ज्यादा वक्रता लिए रहती है चिकित्सा शब्दावली में इसे ही कहा जाता है -Scoliosis .

    24 हड्डियों (अस्थियों )की बनी होती है हमारी रीढ़ (स्पाइन )जिन्हें vertebrae कहा जाता है .रीढ़ की हड्डी की गुर्री का एक अंश है ये vertebra जिसे कशेरुका भी कहा जाता है .रीढ़ वाले प्राणियों को कहा जाता है कशेरुकी जीव (vertebrate ).

    ये कशेरुका एक के ऊपर एक रखी होतीं हैं .रीढ़ को सामने से पीछे की ओर देखने पर वह सीधी (ऋजु रेखीय )ही दिखलाई देती है .

    बेशक रीढ़ एक दम से सीधी नहीं होतीं हैं और ऐसा होना एक दम से सामान्य बात है.नोर्मल ही समझा जाता है .लेकिन जब यही रीढ़ आढ़ी तिरछी टेढ़ी मेढ़ी ज़रुरत से ज्यादा होती है तब यह असामान्य बात है ,एक रोगात्मक स्थिति भी हो सकती है यह जिसका आपको ज़रा भी भान (इल्म )नहीं है .
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  17. दे के देखो अच्छा लगता है,,,
    सार्थक पोस्ट |

    मेरा ब्लॉग-"मन के कोने से..."
    आभार...|

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  18. बहुत अच्छा, कभी मेरे ब्लौग http://www.kuldeepkikavita.blogspot.com पर भी अवस्य आकर टिप्णी करना.

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  19. बढ़िया प्रस्तुति है

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