Sunday 2 September 2012

उमडे मेघा ( हाइकु )


बेचैन धरा
आषाढ ने सताया
बरसो मेघा |

आया सावन
छाई काली घटाएँ
नाचे मयूर |

उमडे मेघा
बरसे छमाछम
धन्य धरती|

हुई बारिश
खिल उठी प्रकृति
जैसे नवोढा |

देखो नजारे
रिमझिम बारिश
नहाते बच्चे |

बरसे पानी
ज्यों अमृत बरसे
जी उठी धरा |

घोर अँधेरा
गुम सुम मौसम
छाई है घटा |

कभी रूठते
कभी क्रोध दिखाते
मेघ सताते |

बरसो मेघा
है किसान व्याकुल
आस न तोड़ो |

विष की बूंदे
बेमौसमी बारिश
यूं है अमृत |

********************

18 comments:

  1. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 03-09-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-991 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    ReplyDelete
  2. भावपूर्ण हाइकू लिखने में आपका जबाब नही,,,,,,दिलबाग जी,,,

    RECENT POST-परिकल्पना सम्मान समारोह की झलकियाँ,

    ReplyDelete
  3. एक से बढ़के एक हाइकु लायें हैं आप -रूपक भी अभिनव हुई बारिश
    खिल उठी प्रकृति
    जैसे नवोढा |
    फिर गिरी बरसात ,
    उधर बादल से ,
    इधर नैनों से !
    ram ram bhai
    सोमवार, 3 सितम्बर 2012
    Protecting Your Vision from Diabetes Damage मधुमेह पुरानी पड़ जाने पर बीनाई को बचाए रखिये
    Protecting Your Vision from Diabetes Damage

    मधुमेह पुरानी पड़ जाने पर बीनाई को बचाए रखिये

    ?आखिर क्या ख़तरा हो सकता है मधुमेह से बीनाई को

    * एक स्वस्थ व्यक्ति में अग्नाशय ग्रंथि (Pancreas) इतना इंसुलिन स्राव कर देती है जो खून में तैरती फ़ालतू शक्कर को रक्त प्रवाह से निकाल बाहर कर देती है और शरीर से भी बाहर चली जाती है यह फ़ालतू शक्कर (एक्स्ट्रा ब्लड सुगर ).

    मधुमेह की अवस्था में अग्नाशय अपना काम ठीक से नहीं निभा पाता है लिहाजा फ़ालतू ,ज़रुरत से कहीं ज्यादा शक्कर खून में प्रवाहित होती रहती है .फलतया सामान्य खून के बरक्स खून गाढा हो जाता है .

    अब जैसे -जैसे यह गाढा खून छोटी महीनतर रक्त वाहिकाओं तक पहुंचता है ,उन्हें क्षतिग्रस्त करता आगे बढ़ता है .नतीज़न इनसे रिसाव शुरु हो जाता है .

    ReplyDelete
  4. मेघों पर बहुत सुन्दर हाईकू ! सभी एक से बढ़ कर एक !

    ReplyDelete
  5. "उमड़े मेघा"- हाइकू,पढ़ नाचा मन मोर
    मौसम बरखा का बड़ा,सचमुच है चितचोर
    सचमुच है चितचोर,विर्क जी कुशल चितेरे
    पाँच सात फिर पाँच, वर्ण की छटा बिखेरे
    भाव बदरिया हृदय-गगन में उमड़े घुमड़े
    पढ़ नाचा मन मोर,हाइकू -"मेघा उमड़े" ||

    ReplyDelete
  6. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

    ReplyDelete
  7. ये हाइकू बारिश से ज्यादा अच्छे हैं.

    ReplyDelete
  8. खूबसूरत हाइकू बहुत ही अच्छे लगे |

    ReplyDelete
  9. हाइकू की प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

    ReplyDelete
  10. मैंने आपका ब्लॉग देखा अच्छा लगा..कभी समय मिले तो http://pankajkrsah.blogspot.com पर पधारने का कष्ट करें आपका स्वागत है ...सादर

    ReplyDelete
  11. देखन में छोटे लगें ... घाव करें अती तेज ...
    सभी हाइकू लाजवाब ...

    ReplyDelete
  12. सुन्दर प्रस्तु्ति

    ReplyDelete
  13. ░░█░█▌█▀▀█ █▀▀█ █▀▀█ █▌▄█░░
    ░░█▀█▌█▄▄█ █▄▄█ █▄▄█ █▄██░░
    ░░█░█▌█▌▐█ █▌░░ █▌░░ ░██░░░
    ░╔╦═╦╗───╔╗──────╔╗─▄▄─▄▄▀▀▄▀▀▄
    ░║║║║╠═╦═╣╠╦═╦═╦╦╝║███████───▄▀
    ░║║║║║╩╣╩╣═╣╩╣║║║╬║▀█████▀▀▄▀
    ░╚═╩═╩═╩═╩╩╩═╩╩═╩═╝──▀█▀
    From Another Annual Day

    ReplyDelete

लिखिए अपनी भाषा में

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...