Monday 1 October 2012

माता का सम्मान

भारत भूमि सुहावनी, बसती अपनी जान|
जीवन में सबसे बड़ा, माता का सम्मान||
माता का सम्मान, मातु या धरती माता|
हमको इनके हेतु, प्राण देना है आता|
कह 'झंझट' झन्नाय, रहो हर पल सेवारत|
बने विश्वशिरमौर, हमारा प्यारा भारत|१|

6 comments:

  1. .

    "भारत भूमि सुहावनी, बसती अपनी जान|
    जीवन में सबसे बड़ा, माता का सम्मान||"

    भाई सुरेन्द्र जी
    बहुत सुंदर कुंडली लिखी आपने ...

    आजकल आप अपने ब्लॉग पर पोस्ट क्यों नहीं लगा रहे ?

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  2. बहुत सुन्दर कुंडली भाई जी ||

    ReplyDelete
  3. कह 'झंझट' झन्नाय, रहो हर पल सेवारत|
    बने विश्वशिरमौर, हमारा प्यारा भारत|१|
    आमीन !

    ReplyDelete
  4. माता का सम्मान
    भारत भूमि सुहावनी, बसती अपनी जान|
    जीवन में सबसे बड़ा, माता का सम्मान||
    माता का सम्मान, मातु या धरती माता|
    हमको इनके हेतु, प्राण देना है आता|
    कह 'झंझट' झन्नाय, रहो हर पल सेवारत|
    बने विश्वशिरमौर, हमारा प्यारा भारत|१|

    बढ़िया प्रस्तुति .

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