Monday 22 October 2012

,,,,आ जा सिंहवाहिनी

आदिशक्ति     जगजननी    तू    है त्रिकालरूप
सदा    ही   समाज में     रहेगी    मातु    दाहिनी ।
शक्ति  के  समेत    विष्णु,ब्रह्म,हे पुरारि  नाथ,
काली    हे     करालरूप !     पाप-ताप    दाहिनी  ।
साजि दे समाज मातु भक्तों की भावना भी,
करि    दे अभय ,    पाहिमाम        विश्वपाहिनी ।
मातु हंसवाहिनी तू  ,  आ जा रे बजाती बीन,
सिंह   पर   सवार    मातु,  आ  जा  सिंहवाहिनी ।

6 comments:

  1. नमन माँ ||
    शुभकामनायें ||

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    दुर्गाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  3. सिह पे सवार मातु आ जा सिंह वाहिनि ।
    माँ सुन लो पुकार अब तो ।

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