Monday 5 November 2012

प्रीति की रीति

प्रीति की रीति इतनी निभा दीजिये!
मेरे आंसू हैं मोती बना दीजिये!
सिर्फ इक बार अधरों से छूकर मुझे,
मैं हूँ पत्थर नगीना बना दीजिये!!

10 comments:

  1. आभार आपका झंझट भाई! बहुत दिन बाद इस ब्लॉग की सुधि ली गयी!...बहुत सुन्दर!

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति |
    आभार ||

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  3. sabhi panktiya damkhm vaki haiप्रीति की रीति इतनी निभा दीजिये!
    मेरे आंसू हैं मोती बना दीजिये!
    सिर्फ इक बार अधरों से छूकर मुझे,
    मैं हूँ पत्थर नगीना बना दीजिये!!

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  4. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .बहुत अद्भुत अहसास.सुन्दर प्रस्तुति.
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को !

    मंगलमय हो आपको दीपो का त्यौहार
    जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार
    ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार
    लक्ष्मी की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार..

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (06-01-2013) के चर्चा मंच-1116 (जनवरी की ठण्ड) पर भी होगी!
    --
    कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि चर्चा में स्थान पाने वाले ब्लॉगर्स को मैं सूचना क्यों भेजता हूँ कि उनकी प्रविष्टि की चर्चा चर्चा मंच पर है। लेकिन तभी अन्तर्मन से आवाज आती है कि मैं जो कुछ कर रहा हूँ वह सही कर रहा हूँ। क्योंकि इसका एक कारण तो यह है कि इससे लिंक सत्यापित हो जाते हैं और दूसरा कारण यह है कि किसी पत्रिका या साइट पर यदि किसी का लिंक लिया जाता है उसको सूचित करना व्यवस्थापक का कर्तव्य होता है।
    सादर...!
    नववर्ष की मंगलकामनाओं के साथ-
    सूचनार्थ!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. आपकी प्रेम भाव की जवाब नहीं :अति सुंदर ,बधाई
    नई पोस्ट में :" अहंकार " http://kpk-vichar.blogspot.in

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