Saturday 20 April 2013

विडम्बना

चौराहे पर कीचड़ सना वह आदमी जो अभी मरा है एक बूँद पानी को तरसता अभी लोग उसे सहानूभूति पूर्वक घड़ों पानी नहलाएँगे फिर पवित्र गंगा में प्रवाहित कर देंगे

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6 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    साझा करने के लिए आभार...!

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  2. यही तो विडंबन है ,जिसका ज़वाब नहीं .

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  3. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति विचारों की | आभार

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    http://www.tamasha-e-zindagi.blogspot.in
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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आभार.

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