Sunday 1 December 2013

फंदे में निर्दोष, फंसे फंदे पे झूलें-

मारक धारा का कहीं, दुरुपयोग ना होय |
हँसी ख़ुशी सह शान्ति भी, जाए नहीं बिलोय |

जाये नहीं बिलोय, कहीं षड्यन्त्रिण छूले  |
फंदे में निर्दोष, फंसे फंदे पे झूलें |

है रविकर शंकालु, तथ्य पर सोच दुबारा |
मिला बड़ा हथियार, दीखती मारक धारा ||

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (02-112-2013) को "कुछ तो मजबूरी होगी" (चर्चा मंचःअंक-1449)
    पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    umda.

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  4. क्या बात भाई रविकर जी वाह! आभार

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