Tuesday 3 December 2013

कैसे चढ़ते तरुण, चढ़ी है जिनके दारु

जीना ऊपर था खड़ा, लिफ्ट लताड़ लगाय |
नीचे वापस क्या हुई, जीना दे समझाय |

जीना दे समझाय, चढ़ा बुड्ढे बीमारू |
कैसे चढ़ते तरुण, चढ़ी है जिनके दारु |

कर दरवाजा बंद, किया हरकतें कमीना |
बिजली करे अनर्थ,, व्यर्थ है तेरा जीना ||

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (04-12-2013) को कर लो पुनर्विचार, पुलिस नित मुंह की खाये- चर्चा मंच 1451
    पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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