Sunday, 10 March, 2013

आला आशिक आस्तिक, आत्मिक आद्योपांत

आला आशिक आस्तिक,  आत्मिक आद्योपांत ।
आत्म-विस्मरित आत्म-रति, रहे हमेशा शांत ।

रहे हमेशा शांत, ईष्ट से लौ लग जाए ।
उधर नास्तिक देह, स्वयं को केवल भाये ।

कहते मिथ्या मोक्ष, नकारे खुदा, शिवाला ।
भटके बिन आलम्ब, जला के प्रेम-पुआला ॥ 
आत्म-विस्मरित=अपना ध्यान ना रखने वाला 
आत्मरत नहीं बल्कि 
आत्म-रति=ब्रह्मज्ञान 

Thursday, 7 March, 2013

निष्फल करना कठिन, दुर्जनों के मनसूबे -

मन सूबे से स्वार्थ से, जुड़े धर्म से सोच । 
गर्व करें निज वंश पर, रहा अन्य को नोंच । 


रहा अन्य को नोंच, बढ़ी जाती कट्टरता । 
जिनकी सोच उदार, मूल्य वह भारी भरता । 

 भारी पड़ते दुष्ट, आज सज्जन मन ऊबे । 
निष्फल करना कठिन,  दुर्जनों के मनसूबे ॥ 

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