Tuesday 17 December 2013

पूँछे हगना-मूतना, जाय जाय हर वार्ड-



 जमा विधायक आप के, खेल शर्तिया कार्ड |
पूँछे हगना-मूतना, जाय जाय हर वार्ड |

जाय जाय हर वार्ड, सतत नौटंकी चालू |
कहीं जाय ना रपट, सड़क सत्ता की ढालू |

पचा पाय ना जीत, बिगड़ता जाय हाजमा |
वोट बैंक की नीति, लगाए फिर-फिर मजमा ||


दायें बायें जाय के, कैसे काटूं कान |
कूट कूट कर जो भरा, काया में ईमान |

काया में ईमान, बिठाया लोकपाल भी |
बहुत बजाया गाल, दिया है साथ ताल भी |

ताल-मेल का ताल, डुबकियां आप लगाएं | 
*कूटकर्म से मार, मछलियां दायें-बायें ||  

 काना राजा भी भला, हम अंधे बेचैन |
सहमत हम सब मतलबी, प्यासे कब से नैन |

प्यासे कब से नैन, सात सौ लीटर पानी |
गै पानी मा भैंस, शर्त की की नादानी |

सत्ता को अब तलक, मात्र मारा है ताना |
पाय खुला भू-फलक, नहीं अब "आप" छकाना |


टोपी बिन पहचान में, नहीं आ रहे आप |
लगे अवांछित आम जन, अपना रस्ता नाप | 

अपना रस्ता नाप, शाप है धरती माँ का |
बको अनाप-शनाप, भिड़ेगा तब ही टाँका |

चतुर करेगा राज, होय चाहे आरोपी |
डुबकी आप लगाय, लगा लो बस यह टोपी ||  

Tuesday 3 December 2013

कैसे चढ़ते तरुण, चढ़ी है जिनके दारु

जीना ऊपर था खड़ा, लिफ्ट लताड़ लगाय |
नीचे वापस क्या हुई, जीना दे समझाय |

जीना दे समझाय, चढ़ा बुड्ढे बीमारू |
कैसे चढ़ते तरुण, चढ़ी है जिनके दारु |

कर दरवाजा बंद, किया हरकतें कमीना |
बिजली करे अनर्थ,, व्यर्थ है तेरा जीना ||

Sunday 1 December 2013

फंदे में निर्दोष, फंसे फंदे पे झूलें-

मारक धारा का कहीं, दुरुपयोग ना होय |
हँसी ख़ुशी सह शान्ति भी, जाए नहीं बिलोय |

जाये नहीं बिलोय, कहीं षड्यन्त्रिण छूले  |
फंदे में निर्दोष, फंसे फंदे पे झूलें |

है रविकर शंकालु, तथ्य पर सोच दुबारा |
मिला बड़ा हथियार, दीखती मारक धारा ||

लिखिए अपनी भाषा में

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