Monday, 26 March, 2012

....आ जा सिंहवाहिनी

आदिशक्ति      जगजननी      तू है    त्रिकालरूप ,
आज  तू    समाज  में      रहेगी    मातु    दाहिनी ।
शक्ति के समेत विष्णु , ब्रह्म, हे पुरारि नाथ ,
काली   हे    करालरूप         पाप-ताप     दाहिनी ।
साजि दे समाज आज भक्तों की भावना भी ,
करि    दे    अभय     पाहि माम     विश्वपाहिनी ।
मातु हंसवाहिनी तू      आ जा रे बजाती बीन ,
सिंह     पे     सवार मातु    आ जा सिंहवाहिनी ।

6 comments:

  1. जय माँ...
    सुन ले पुकार......

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  2. दिल से दिल्ली तक करे, त्राहिमाम इंसान ।

    मैया ले हमको बचा, तुझ पर बड़ा गुमान ।।

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  3. bahut achcha likha hai jai durge maa.

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  4. जैकारा शेरा वाली माँ का बोल साचे दरबार की जय...

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