Thursday, 7 March, 2013

निष्फल करना कठिन, दुर्जनों के मनसूबे -

मन सूबे से स्वार्थ से, जुड़े धर्म से सोच । 
गर्व करें निज वंश पर, रहा अन्य को नोंच । 


रहा अन्य को नोंच, बढ़ी जाती कट्टरता । 
जिनकी सोच उदार, मूल्य वह भारी भरता । 

 भारी पड़ते दुष्ट, आज सज्जन मन ऊबे । 
निष्फल करना कठिन,  दुर्जनों के मनसूबे ॥ 

6 comments:

  1. Nice.

    सुश्री मायावती जी के शासनकाल में राजा भैया के निवास पर पुलिस अधिकारी श्री आर. एस. पांडेय जी ने छापा मारा था। उसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं और फिर एक दिन उन्हें सड़क पर किसी वाहन से कुचल कर मार दिया गया। सन 2004 से उस केस की जांच सीबीआई कर रही है। जांच अभी चल ही रही है।
    पुलिस अधिकारी मारे जा रहे हैं और क़ातिल माफ़िया सत्ता संभाले हुए हैं।
    क्या इस तरह की बातों का इंसान के ज़मीर और उसके मन पर कोई असर नहीं पड़ता ?

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  2. डॉ अनवर जमाल साहब के उदगार और हताशा हमारी साझा है .इस बदइंतजामिया का किया धरा है यह सब जहां माफिया विधायिका और संसद में घुसा हुआ है .सड़ा हुआ संडास हैं ये इमारतें ........प्रजा तंत्र की कब्र खोद रहीं हैं .इसीलिए कोई अफज़ल रचता है षड्यंत्र इस माफिया के खिलाफ .

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  3. रविकर भाई! प्रजातन्त्र की प्रथम आवश्यक शर्त है प्रजा की शिक्षा और जागरूकता उसके अभाव में वही सब होता रहेगा जो नहीं होना चाहिए और जो हो रहा है हाँ नहीं तो!

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  4. रविकर जी! आपकी यह सामयिक सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 08.03.2013 को झटपट करले व्याह, छोड़ मोदी आमोदी : चर्चा मंच 1177 पर लिंक की जा रही है सादर सूचनार्थ

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